US रेगुलेटर FCC ने Amazon की **$11.5 बिलियन** वाली Globalstar डील को हरी झंडी दे दी है। इस अधिग्रहण से Amazon सीधे Starlink को टक्कर देने के लिए तैयार है, क्योंकि कंपनी को अब जरूरी स्पेक्ट्रम और Apple की **20%** हिस्सेदारी मिल गई है।
सैटेलाइट इंटरनेट की रेस में नया मोड़
US की फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) ने Amazon के $11.5 बिलियन के Globalstar अधिग्रहण को मंजूरी दे दी है। यह कदम Amazon के महत्वाकांक्षी सैटेलाइट ब्रॉडबैंड नेटवर्क, जिसे 'Amazon Leo' कहा जा रहा है, के लिए एक बड़ा गेम चेंजर साबित होगा। इसका सीधा मकसद Elon Musk की कंपनी SpaceX Starlink को चुनौती देना है। इस डील के जरिए Amazon को न केवल सैटेलाइट्स का नेटवर्क मिला है, बल्कि सबसे अहम 'स्पेक्ट्रम' भी हासिल हुआ है जो इन सेवाओं को चलाने के लिए जरूरी है।
'डायरेक्ट-टू-डिवाइस' तकनीक का दबदबा
इस डील की सबसे बड़ी खूबी है 'डायरेक्ट-टू-डिवाइस' (Direct-to-device) टेक्नोलॉजी। इसके तहत आम स्मार्टफोन सीधे स्पेस में मौजूद सैटेलाइट से कनेक्ट हो पाएंगे, जिसके लिए किसी अलग डिश या हार्डवेयर की जरूरत नहीं होगी। फिलहाल Starlink के पास 11,000 से ज्यादा सक्रिय सैटेलाइट्स का विशाल बेड़ा है, जबकि Amazon 2029 तक 3,200 सैटेलाइट्स लॉन्च करने की तैयारी में है।
Apple का एंगल और भविष्य की चुनौतियां
निवेशकों के लिए इस डील का सबसे अहम पहलू Apple है। Globalstar फिलहाल Apple के 'Emergency SOS' फीचर के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर पार्टनर है। Apple के पास कंपनी में 20% की इक्विटी है और उसके रेवेन्यू में Apple की हिस्सेदारी लगभग 63% है। Amazon ने भरोसा दिलाया है कि वह इस सेवा को जारी रखेगा।
हालांकि, इतनी बड़ी पूंजी खर्च करना जोखिम भरा भी है। Amazon ने इस प्रोजेक्ट के लिए $10 बिलियन से ज्यादा का निवेश पहले ही तय कर रखा है। कंपनी का लक्ष्य 2026 के अंत तक कमर्शियल सेवाएं शुरू करना है, लेकिन भारी लागत और तकनीकी चुनौतियों के चलते निवेशकों को कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर नजर रखनी होगी।
