Amazon और Flipkart ने अपने प्लेटफॉर्म से उन इंटरनेट-कनेक्टेड सुरक्षा कैमरों को हटाना शुरू कर दिया है, जिनके पास जरूरी Bureau of Indian Standards (BIS) सर्टिफिकेशन नहीं है। सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर उठाया गया यह कदम ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के लिए सरकार की सख्ती को दर्शाता है।
सरकारी नियमों के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से सभी इंटरनेट-कनेक्टेड CCTV हार्डवेयर के लिए Standardisation Testing and Quality Certification (STQC) निदेशालय से टेस्टिंग अनिवार्य कर दी गई है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा में सेंध लगाने वाली खामियों को रोकना है, ताकि अनधिकृत डेटा ट्रांसमिशन और संभावित जासूसी जैसी घटनाओं पर लगाम लगाई जा सके।
ई-कॉमर्स के लिए नई चुनौती
अब तक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स खुद को केवल एक 'बिचौलिया' मानते थे, लेकिन रेगुलेटरी अथॉरिटीज ने इस तर्क को खारिज कर दिया है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि प्लेटफॉर्म्स अपने पोर्टल पर बिकने वाले सामानों की क्वालिटी और नियमों के पालन के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे। इसका सीधा असर कंपनी के ऑपरेशनल खर्चों पर पड़ सकता है, क्योंकि उन्हें अब थर्ड-पार्टी सेलर्स की लिस्टिंग पर अधिक कड़ाई से ऑडिट करना होगा।
सरकार की बढ़ती सख्ती
सितंबर 2026 में Central Consumer Protection Authority ने Amazon और Flipkart पर ₹10 लाख का जुर्माना लगाया था, जिसकी वजह एक बिना रजिस्ट्रेशन वाली खरपतवार नाशक दवा (herbicide) की बिक्री थी। यह वाकया दर्शाता है कि सरकार प्लेटफॉर्म गवर्नेंस को लेकर कितनी गंभीर है।
बाजार में फिलहाल यह असर दिख रहा है कि कई ब्रांड्स ने नियमों के पालन तक अपने रिमोट कनेक्टिविटी फीचर्स को डिसेबल कर दिया है। निवेशकों के लिए अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये कंपनियां सेलर्स की संख्या और रेगुलेटरी नियमों के बीच संतुलन कैसे बनाती हैं, क्योंकि अनुपालन (compliance) न होने की स्थिति में ऑपरेशंस पर असर पड़ना तय है।
