Amazon का बड़ा कबूलनामा: 2040 तक नेट-जीरो का लक्ष्य फिलहाल धुंधला, AI की बढ़ती भूख बनी चुनौती

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AuthorAditya Rao|Published at:
Amazon का बड़ा कबूलनामा: 2040 तक नेट-जीरो का लक्ष्य फिलहाल धुंधला, AI की बढ़ती भूख बनी चुनौती

ई-कॉमर्स दिग्गज Amazon ने माना है कि 2040 तक नेट-जीरो कार्बन एमिशन के लक्ष्य तक पहुँचने के लिए अभी तक कोई ठोस रोडमैप तैयार नहीं है। AI और क्लाउड कंप्यूटिंग की भारी बिजली खपत ने कंपनी के सामने एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

चुनौती और हकीकत

$700 बिलियन से ज्यादा रेवेन्यू वाली कंपनी Amazon ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि उनके पास 2040 के नेट-जीरो टारगेट को हासिल करने का कोई स्पष्ट प्लान नहीं है। कंपनी की चीफ सस्टेनेबिलिटी ऑफिसर कारा हर्स्ट ने पुष्टि की है कि लक्ष्य तो बरकरार है, लेकिन वहां तक पहुँचने का रास्ता अभी तय नहीं हुआ है। यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया भर की टेक कंपनियां AI इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार में जुटी हैं।

AI का दबाव और रिन्यूएबल एनर्जी की सीमाएं

समस्या की जड़ में Amazon का AWS डिवीजन है। हालांकि कंपनी पहले से ही 42 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी की खरीद के साथ दुनिया की सबसे बड़ी कॉर्पोरेट खरीदार बनी हुई है, लेकिन AI की प्रोसेसिंग के लिए जो निरंतर बिजली (Baseload Power) चाहिए, वह केवल सोलर या विंड एनर्जी से मिलना मुश्किल है।

फॉसिल फ्यूल की ओर झुकाव?

हालिया रिपोर्ट्स से संकेत मिले हैं कि Amazon अब 7.65 गीगावाट के नेचुरल गैस पावर प्लांट प्रोजेक्ट्स पर गौर कर रही है ताकि AI डेटा सेंटर्स को निर्बाध बिजली मिल सके। अगर ये प्रोजेक्ट पूरे होते हैं, तो यह सालाना 3.3 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित कर सकते हैं। यह कदम शेयरधारकों के लिए एक बड़ी दुविधा पैदा कर रहा है—क्या कंपनी AI मार्केट शेयर जीतने के लिए अपने पर्यावरण (ESG) लक्ष्यों से समझौता कर रही है?

निवेशकों के लिए नजरिया

आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कंपनी कैसे बिना कार्बन फुटप्रिंट बढ़ाए अपनी बिजली की जरूरतें पूरी करती है। सरकार, प्राइवेट सेक्टर और यूटिलिटी प्रोवाइडर्स के बीच तालमेल ही तय करेगा कि कंपनी अपने वादों पर खरी उतरती है या नहीं। शेयरधारकों को कंपनी द्वारा जारी किए जाने वाले नए 'कार्बन रिडक्शन स्ट्रेटजी' अपडेट्स पर पैनी नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इन लक्ष्यों का पूरा न होना कंपनी की वैश्विक छवि और निवेश इंडेक्स पर असर डाल सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.