Alphabet के मालिकाना हक वाली Google के लिए एक बड़ा झटका सामने आया है। अमेरिकी अदालत ने एक क्लास-एक्शन मुकदमे में वकीलों को **$14.7 करोड़** (करीब **₹147 मिलियन**) की लीगल फीस देने का आदेश सुनाया है। यह फैसला 2025 में डेटा कलेक्शन को लेकर आए एक पुराने वर्डिक्ट से जुड़ा है, जिसे लेकर अब कंपनी अपील की तैयारी कर रही है।
भारी जुर्माना और लीगल फीस का गणित
अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए $14.7 करोड़ की राशि उन वकीलों को देने का निर्देश दिया है जिन्होंने मुकदमे में वादियों का प्रतिनिधित्व किया था। यह आदेश सितंबर 2025 के उस जूरी फैसले के बाद आया है, जिसमें Google को उन यूजर्स का डेटा ट्रैक करने का दोषी पाया गया था, जिन्होंने स्पष्ट रूप से 'ऑप्ट-आउट' विकल्प चुना था। ब्याज के साथ इस पूरे मामले का वित्तीय बोझ अब $44 करोड़ के पार पहुंच चुका है।
दिलचस्प बात यह है कि इस सेटलमेंट का एक बड़ा हिस्सा लीगल फीस के रूप में जा रहा है, जबकि प्रभावित यूजर्स को प्रति व्यक्ति $5 से भी कम राशि मिलने की संभावना है। यह अमेरिका में होने वाली बड़ी क्लास-एक्शन सेटलमेंट्स की एक सामान्य तस्वीर पेश करता है।
बिग टेक के लिए रेगुलेटरी रिस्क
Alphabet जैसे दिग्गज के लिए $14.7 करोड़ का भुगतान कोई बहुत बड़ी बात नहीं हो सकती क्योंकि उनके पास कैश रिजर्व काफी मजबूत है। लेकिन, निवेशकों के लिए चिंता का विषय 'रेगुलेटरी माहौल' है। टेक कंपनियां जिस तरह से डेटा कलेक्ट और मॉनिटाइज करती हैं, उस पर दुनियाभर में दबाव बढ़ रहा है। ऐसे कानूनी विवाद भविष्य में कंप्लायंस कॉस्ट बढ़ा सकते हैं और प्रोडक्ट फीचर्स में बदलाव की मजबूरी पैदा कर सकते हैं, जिससे मार्केट सेंटिमेंट पर असर पड़ना तय है।
आगे का रास्ता: अपील की तैयारी
हालांकि अदालत ने फीस फाइनल कर दी है, लेकिन Alphabet ने हार नहीं मानी है। कंपनी ने अपनी सफाई में कहा है कि वादी यह साबित करने में नाकाम रहे कि यूजर्स को डेटा नीतियों को लेकर गुमराह किया गया था। कंपनी अब 2025 के वर्डिक्ट के खिलाफ औपचारिक अपील करने जा रही है। निवेशकों की नजरें इस अपील पर टिकी रहेंगी, क्योंकि इसका परिणाम यह तय करेगा कि भविष्य में डेटा प्राइवेसी को लेकर टेक कंपनियों के खिलाफ कानूनी मामले किस दिशा में मुड़ेंगे।
