Alphabet के निवेशकों के लिए चिंता का विषय है क्योंकि कंपनी के Q3 नतीजों में सर्च विज्ञापन ग्रोथ घटकर **12%** रह गई है। कंपनी अब AI-इंटीग्रेटेड विज्ञापनों पर जोर दे रही है ताकि कमाई को रफ्तार दी जा सके, लेकिन भारी-भरकम AI इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च ने निवेशकों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।
सर्च बिजनेस पर दबाव
Alphabet, जो Google की पैरेंट कंपनी है, के लिए Q3 के आंकड़े उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। कंपनी के मुख्य सर्च एडवरटाइजिंग रेवेन्यू में साल-दर-साल केवल 12% की ग्रोथ देखी गई है, जो पिछली तिमाही के 17% और उससे पहले की 19% की ग्रोथ के मुकाबले काफी सुस्त है। मार्केट एक्सपर्ट्स इसे एक बड़ा रेड फ्लैग मान रहे हैं।
AI का महंगा सौदा
निवेशकों के मन में बड़ा सवाल यह है कि क्या डेटा सेंटर्स और पावरफुल चिप्स पर किया जा रहा भारी-भरकम खर्च भविष्य में मुनाफा दे पाएगा? कंपनी अब 'कन्वर्सेशनल डिस्कवरी एड्स' (Conversational Discovery Ads) पर दांव लगा रही है, जो Gemini-पावर्ड AI टूल्स के जवाबों में ही स्पॉन्सर्ड लिस्टिंग्स दिखाएंगे। गूगल का मानना है कि जैसे-जैसे यूजर सर्च करने का तरीका बदल रहे हैं, यह रणनीति कारगर साबित होगी।
Google Cloud बनी उम्मीद की किरण
जहां सर्च रेवेन्यू ने निराश किया, वहीं Google Cloud डिवीजन का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा। कंपनी ने इस सेगमेंट में $30.7 बिलियन का रेवेन्यू दर्ज किया है, जो साल-दर-साल 103% की दमदार बढ़त है। यह साबित करता है कि कंपनी ट्रेडिशनल सर्च के अलावा भी अपनी कमाई के नए रास्ते तलाशने में सफल हो रही है।
आगे का रास्ता
फिलहाल, निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या नए AI एड फॉर्मेट पारंपरिक सर्च विज्ञापनों के बराबर मुनाफा कमा पाएंगे। बढ़ती मल्टीमॉडल सर्चिंग (वॉइस, इमेज और डॉक्यूमेंट्स) के युग में, गूगल को अपने विज्ञापन प्रारूपों को और प्रभावी बनाना होगा। क्या क्लाउड की बढ़त सर्च के धीमेपन की भरपाई कर पाएगी? यह आने वाली तिमाहियों में ही साफ हो पाएगा।
