Alphabet का EU पर बड़ा प्रहार: डेटा शेयरिंग नियमों के खिलाफ कोर्ट पहुंची कंपनी

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AuthorNeha Patil|Published at:
Alphabet का EU पर बड़ा प्रहार: डेटा शेयरिंग नियमों के खिलाफ कोर्ट पहुंची कंपनी

Alphabet ने लक्जमबर्ग जनरल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कंपनी यूरोपीय संघ (EU) के उस आदेश को रुकवाना चाहती है, जिसके तहत उसे अपना सर्च डेटा AI प्रतिद्वंद्वियों के साथ साझा करना पड़ सकता है।

डेटा शेयरिंग का विवाद

Alphabet Inc. ने लक्जमबर्ग जनरल कोर्ट में औपचारिक चुनौती दाखिल की है। कंपनी का मकसद यूरोपीय आयोग (European Commission) के उस आदेश पर रोक लगाना है, जो उन्हें अपना प्रोप्राइटरी सर्च डेटा AI कंपीटीटर्स के साथ शेयर करने के लिए मजबूर करता है। गूगल का कहना है कि यह डेटा केवल सर्च परफॉरमेंस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्राइवेसी और सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है।

Digital Markets Act की चुनौती

यूरोपीय संघ ने Alphabet को एक 'गेटकीपर' के तौर पर चिन्हित किया है। उनका तर्क है कि डेटा तक पहुंच खोलने से छोटे स्टार्ट-अप्स को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। लेकिन कंपनी इसे अपने सर्च इकोसिस्टम के लिए एक बड़ा स्ट्रक्चरल रिस्क मान रही है।

निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?

निवेशकों के लिए यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि गूगल का पूरा रेवेन्यू मॉडल इसी डेटा और एल्गोरिदम पर आधारित है। अगर कंपनी को अपना डेटा शेयर करना पड़ता है, तो यह उसका 'कॉम्पिटिटिव मोज़' (Competitive Moat) कमजोर कर सकता है, जिसका सीधा असर विज्ञापन कारोबार और मार्जिन पर पड़ने की आशंका है।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या अदालत इस अंतरिम आदेश पर स्टे (Stay) लगाती है या कंपनी को इन नए नियमों का पालन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.