यूरोपीय यूनियन (EU) के नियामकों ने Alphabet (Google) को बड़ा झटका दिया है। नए नियमों के तहत Google को अपने Android ऑपरेटिंग सिस्टम और सर्च डेटा को प्रतिद्वंद्वी AI सेवाओं के लिए खोलना होगा। यह कदम कंपनी के मार्केट डोमिनेंस को कम करने के लिए उठाया गया है।
Android और AI इंटीग्रेशन पर असर
यूरोपीय आयोग (European Commission) ने Alphabet की Google को अपने प्रमुख प्लेटफॉर्म्स को प्रतिस्पर्धियों के लिए खोलने का आदेश दिया है। यह नया नियम यूरोपीय संघ के डिजिटल मार्केट्स एक्ट (Digital Markets Act) के तहत लागू किया गया है, जिसका मकसद बड़ी टेक कंपनियों का दबदबा कम कर AI और सर्च इंजन के क्षेत्र में ज्यादा प्रतिस्पर्धा लाना है।
नियामकों ने Android ऑपरेटिंग सिस्टम की 11 खास फीचर्स की पहचान की है, जिनका एक्सेस अब Google को दूसरों को देना होगा। इससे थर्ड-पार्टी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस असिस्टेंट्स को Google के Gemini AI जैसी क्षमताएं मिल सकेंगी। उम्मीद है कि जुलाई 2027 तक, EU में Android यूजर्स वॉयस कमांड के जरिए प्रतिद्वंद्वी AI असिस्टेंट्स को एक्टिवेट कर पाएंगे, ठीक वैसे ही जैसे वे अभी 'Hey Google' का इस्तेमाल करते हैं। इससे मोबाइल डिवाइसेस पर AI सेवाओं के काम करने का तरीका बदल सकता है, खासकर लोकल डेटा जैसे राइड-बुकिंग या जानकारी खोजने में।
डेटा शेयरिंग और रेगुलेटरी टाइमलाइन
Android के अलावा, EU ने Google को निर्देश दिया है कि वह अपने एनोनिमाइज्ड (anonymized) सर्च डेटा को प्रतिद्वंद्वी AI चैटबॉट्स के साथ भी शेयर करे। इसका मकसद यह है कि प्रतिस्पर्धी कंपनियां इस डेटा का उपयोग करके अपनी सर्च फंक्शनैलिटी को बेहतर बना सकें, क्योंकि यह डेटा अब तक Google के पास एक्सक्लूसिव था। यह नियम जनवरी 2026 से लागू होगा। आयोग ने डेटा की कीमत तय करने का एक फॉर्मूला भी तैयार किया है, और Google को डेटा शेयरिंग की इन आवश्यकताओं को मौजूदा साइबर सुरक्षा और डेटा सुरक्षा मानकों के साथ संतुलित करना होगा।
कंपनी का रुख और संभावित जोखिम
Google ने इन उपायों का सार्वजनिक रूप से विरोध किया है। कंपनी के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि इन नियमों से यूजर प्राइवेसी और डिवाइस की सुरक्षा से समझौता हो सकता है। कंपनी का तर्क है कि यह फैसला यूजर्स को संभावित नुकसान के सबूतों को नजरअंदाज करता है और EU नियमों का पालन करते हुए प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाने के आंतरिक प्रयासों को भी अनदेखा करता है। निवेशकों के लिए, यह एक ऐसी स्थिति पैदा करता है जहां कंपनी को नियामक अनुपालन और प्लेटफॉर्म सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के बीच संतुलन बनाना होगा। डेटा शेयरिंग या Android के कामकाज में किसी भी तरह के जबरन बदलाव से इस क्षेत्र में Google की बिजनेस बढ़त बनाए रखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
भविष्य के घटनाक्रमों पर नजर
बाजार विश्लेषकों का मुख्य ध्यान इन आदेशों के लागू होने के चरण पर रहेगा। निवेशकों को यह ट्रैक करना चाहिए कि कंपनी सख्त EU सुरक्षा मानदंडों को पूरा करते हुए सर्च डेटा साझा करने की तकनीकी चुनौतियों से कैसे निपटती है। इसके अलावा, आने वाली तिमाहियों में Google के लॉन्ग-टर्म ऑपरेटिंग मार्जिन पर इसका असर और यूरोपीय बाजार में छोटी AI फर्मों से प्रतिस्पर्धा में संभावित वृद्धि जैसे कारक भी महत्वपूर्ण रहेंगे।
