साल 2027 की शुरुआत से Google ने K-12 स्कूलों के लिए अपनी AI टूल्स को अनिवार्य कर दिया है। अब स्कूलों को या तो पूरा AI इकोसिस्टम अपनाना होगा या सर्च एक्सेस खोना होगा। यह कंपनी के बढ़ते खर्च और गिरते फ्री कैश फ्लो के बीच एक बड़ा कदम है।
स्कूलों के लिए नई गाइडलाइन्स
Google ने शिक्षा क्षेत्र के लिए एक बड़ा पॉलिसी बदलाव किया है। साल 2027 की शुरुआत से K-12 छात्रों के अकाउंट्स में Google Search और Gemini जैसे AI टूल्स डिफ़ॉल्ट रूप से डिसेबल रहेंगे। एडमिनिस्ट्रेटर को इन्हें मैन्युअल रूप से इनेबल करना होगा। कंपनी ने स्पष्ट कर दिया है कि AI फीचर्स अब सर्च आर्किटेक्चर का अभिन्न हिस्सा हैं, इसलिए स्कूल पारंपरिक सर्च और AI को अलग-अलग नहीं चुन सकते। स्कूलों को पूरा इंटीग्रेटेड अनुभव अपनाना होगा, अन्यथा उन्हें सर्च एक्सेस से हाथ धोना पड़ सकता है।
निवेशकों के लिए जोखिम और चुनौतियां
यह कदम Alphabet की उस आक्रामक रणनीति का हिस्सा है जिसमें वह हर स्तर पर AI को थोप रही है। हालांकि, निवेशकों के लिए यह एक पेचीदा स्थिति है। 2026 की तीसरी तिमाही में कंपनी ने $127.6 बिलियन का रेवेन्यू दर्ज किया, जो सालाना 25% की ग्रोथ है। लेकिन यह सफलता भारी कीमत पर आई है। इंफ्रास्ट्रक्चर, AI हार्डवेयर और डेटा सेंटर्स पर कंपनी ने $51.3 बिलियन खर्च कर दिए, जिससे फ्री कैश फ्लो -$9.1 बिलियन के निचले स्तर पर पहुंच गया।
बाजार की घबराहट
इस भारी-भरकम निवेश के कारण अक्टूबर 2026 के अंत में Alphabet के शेयरों में गिरावट देखी गई। मार्केट इस बात को लेकर सशंकित है कि क्या पारंपरिक सर्च मॉडल से मिलने वाले मुनाफे की जगह यह नया AI मॉडल ले पाएगा। इसके अलावा, रेगुलेटरी जांच का खतरा भी मंडरा रहा है। यदि यह 'ऑल-ऑर-नथिंग' अप्रोच शिक्षकों और नीति-निर्माताओं को पसंद नहीं आई, तो वे Google के इकोसिस्टम से बाहर निकल सकते हैं, जो कंपनी के लिए एक बड़ा रेवेन्यू रिस्क बन सकता है। अब देखना यह है कि क्या कंपनी का यह खर्च भविष्य में मुनाफे में बदल पाएगा या नहीं।
