Alphabet ने अपने Workspace ऐप्स के लिए 'Google Pics' नाम का एक नया जेनरेटिव AI टूल पेश किया है। यह टूल सीधे तौर पर Canva और Adobe Express जैसी डिजाइन कंपनियों को चुनौती देगा। हालांकि, निवेशक इस बात पर नजर गड़ाए हुए हैं कि इस तरह के बड़े AI प्रोजेक्ट्स पर होने वाला भारी खर्च कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन और कैश फ्लो पर क्या असर डालेगा।
क्या है 'Google Pics' का दम?
गूगल की पैरेंट कंपनी Alphabet ने अपनी प्रोडक्टिविटी सुइट को और अधिक एडवांस बनाते हुए 'Google Pics' लॉन्च किया है। यह टूल 'Nano Banana' मॉडल पर आधारित है, जो Google Docs और Slides में यूजर्स को टेक्स्ट प्रॉम्प्ट के जरिए तस्वीरें बनाने, एडिट करने और उन्हें बदलने की सुविधा देता है। कंपनी का मकसद उन कॉर्पोरेट यूजर्स को अपनी ओर खींचना है, जो फिलहाल प्रेजेंटेशन या डिजाइन के लिए थर्ड-पार्टी टूल्स का इस्तेमाल करते हैं।
निवेशकों के लिए चुनौतियां
Alphabet का मार्केट कैप इस समय $4 ट्रिलियन के पार है, लेकिन एआई की दौड़ में बने रहने के लिए कंपनी का कैपिटल एक्सपेंडिचर (CapEx) तेजी से बढ़ रहा है। Microsoft और अन्य टेक दिग्गजों से कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच, विश्लेषकों का मानना है कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने का बोझ कंपनी के शॉर्ट-टर्म प्रॉफिट मार्जिन को प्रभावित कर सकता है।
रिस्क और रेगुलेटरी चिंताएं
सिर्फ फाइनेंशियल ही नहीं, बल्कि रेगुलेटरी चुनौतियां भी कम नहीं हैं। कॉपीराइट और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी विवादों से बचने के लिए कंपनी हॉलीवुड स्टूडियोज के साथ लाइसेंसिंग डील करने की कोशिश में है। साथ ही, दुनियाभर के रेगुलेटर्स इस बात पर बारीक नजर रखे हुए हैं कि टेक कंपनियां अपने AI मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए किस तरह का डेटा इस्तेमाल कर रही हैं।
अब देखना यह होगा कि क्या कंपनी अपने 'AI Pro' और 'Ultra' सब्सक्रिप्शन प्लान्स के जरिए इस भारी-भरकम खर्च की भरपाई करने में सफल हो पाती है या नहीं।
