Alphabet ने अपना एक्सपेरिमेंटल AI स्टोरीटेलिंग ऐप 'Dreambeans' भारत में पेश कर दिया है। यह कंपनी का अमेरिका के बाहर पहला विस्तार है। निवेशकों के लिए यह कदम गूगल के इकोसिस्टम को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर हो रहे भारी खर्च ने चिंताएं भी बढ़ा दी हैं।
भारत में दस्तक
Google Labs ने 'Dreambeans' को भारत में लॉन्च कर दिया है, जो यूजर्स के Gmail, Google Photos और Calendar के डेटा का इस्तेमाल कर अपने आप विजुअल स्टोरी तैयार करता है। इस ऐप में हिंदी, बंगाली, तमिल, तेलुगु और पंजाबी सहित 13 स्थानीय भाषाओं का सपोर्ट दिया गया है। हालांकि, अभी इसमें एक तकनीकी बाधा है—यह एक ही कहानी में दो भाषाओं को नहीं मिला सकता, जो कि भारत जैसे बहुभाषी बाजार में एक चुनौती हो सकती है।
निवेशकों के लिए क्यों है अहम?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि Dreambeans का मुख्य मकसद रेवेन्यू कमाना नहीं, बल्कि यूजर्स को गूगल के इकोसिस्टम में और गहराई से जोड़ना है। लेकिन, Alphabet के लिए यह एक 'महंगा' प्रयोग भी है। कंपनी का AI हार्डवेयर और इंफ्रास्ट्रक्चर पर Capital Expenditure (Capex) लगातार बढ़ रहा है, जिस पर निवेशकों की पैनी नजर है। बड़ा सवाल यही है कि क्या ये निवेश भविष्य में मुनाफा देंगे या फिर कंपनी के मार्जिन पर भारी पड़ेंगे?
डेटा प्राइवेसी और प्रतिस्पर्धा
ऐप की कार्यप्रणाली के लिए पर्सनल डेटा—जैसे ईमेल और फोटो—का एक्सेस जरूरी है। भारत के सख्त डेटा प्रोटेक्शन नियमों के बीच, इसे लेकर कोई भी विवाद कंपनी के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है। इसके अलावा, AI टूल्स के क्षेत्र में गलाकाट प्रतिस्पर्धा है। कई बार शुरुआती उत्साह के बाद ऐसे ऐप्स का यूजर बेस तेजी से गिर जाता है। अब बाजार इस बात का इंतजार कर रहा है कि क्या Alphabet इन एक्सपेरिमेंटल टूल्स को भविष्य में एक लाभदायक सर्विस में तब्दील कर पाएगी या नहीं।
