Google Accounts के लिए Alphabet का नया फीचर: अब सेल्फी वीडियो से करें लॉग-इन!

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AuthorMehul Desai|Published at:
Google Accounts के लिए Alphabet का नया फीचर: अब सेल्फी वीडियो से करें लॉग-इन!

Google यूजर्स के लिए अच्छी खबर है! Alphabet ने अकाउंट रिकवरी को और ज़्यादा सुरक्षित बनाने के लिए नया 'सेल्फी वीडियो साइन-इन' फीचर लॉन्च किया है। यह चेहरे की पहचान और 'लाइवनेस डिटेक्शन' जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करके आपकी पहचान वेरिफाई करेगा, जो पासवर्ड का एक बढ़िया विकल्प है।

Detailed Coverage

पासवर्ड को कहें अलविदा!

Alphabet, Google का पेरेंट कंपनी, अपने यूजर्स के लिए सुरक्षा की एक नई परत जोड़ रहा है। कंपनी ने 'सेल्फी वीडियो साइन-इन' नाम का एक नया फीचर पेश किया है, जो Google अकाउंट्स को और ज़्यादा सुरक्षित बनाएगा। इस फीचर के ज़रिए यूजर्स अपना अकाउंट रिकवर कर पाएंगे, खासकर तब जब वे अपना पासवर्ड भूल जाएं या उनका डिवाइस खो जाए।

कैसे काम करेगा यह नया फीचर?

इस नए सिस्टम में, यूजर्स को एक छोटा सा वीडियो रिकॉर्ड करना होगा, जिसमें वे बताए गए निर्देशों के अनुसार अपने सिर को हिलाएंगे। यह वीडियो फेसियल रिकग्निशन और 'लाइवनेस डिटेक्शन' जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करके आपकी पहचान की पुष्टि करेगा। यह सुनिश्चित करेगा कि वीडियो असली है और किसी भी तरह की धोखाधड़ी या नकली वीडियो (जैसे डीपफेक) से अकाउंट को बचाया जा सके। यह फीचर उन यूजर्स के लिए खास तौर पर मददगार होगा जो अपने अकाउंट रिकवरी के पारंपरिक तरीकों, जैसे ईमेल या फोन नंबर, का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं।

आपकी प्राइवेसी, आपकी कंट्रोल

Alphabet इस बात को समझता है कि फेशियल रिकग्निशन और बायोमेट्रिक डेटा के स्टोरेज को लेकर प्राइवेसी को लेकर चिंताएं हो सकती हैं। इसलिए, कंपनी ने साफ किया है कि यूजर्स का अपने बायोमेट्रिक डेटा पर पूरा कंट्रोल होगा। इस वीडियो डेटा का इस्तेमाल सिर्फ अकाउंट सुरक्षा के लिए ही किया जाएगा और यूजर्स कभी भी इस डेटा को डिलीट कर पाएंगे। यह कदम टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में बढ़ते उस चलन का हिस्सा है, जहां कंपनियां पासवर्ड पर निर्भरता कम करके फिंगरप्रिंट या फेशियल स्कैन जैसे बायोमेट्रिक तरीकों को अपना रही हैं।

सुरक्षा का एक नया आयाम

हालांकि यह नया तरीका सुरक्षा को मजबूत करता है, पर यह यूजर के डिजिटल पहचान प्रबंधन को भी बदलता है। पुराने रिकवरी तरीके, जैसे SMS या ऑथेंटिकेटर ऐप के ज़रिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, अभी भी सक्रिय रहेंगे। यह सेल्फी फीचर एक अतिरिक्त सुरक्षा परत के तौर पर काम करेगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सिस्टम बड़े पैमाने पर अकाउंट रिकवरी को कितनी प्रभावी ढंग से संभालता है और स्थायी अकाउंट लॉकआउट की घटनाओं को कम करता है या नहीं। डीपफेक डिटेक्शन सिस्टम का प्रदर्शन भी इस सुरक्षा उपाय की दीर्घकालिक विश्वसनीयता तय करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.