Alphabet ने कनाडा, फ्रांस और जापान जैसे देशों में अपने कर्मचारियों के लिए वॉलंटरी एग्जिट प्रोग्राम का दायरा बढ़ा दिया है। कंपनी का मकसद AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर हो रहे भारी खर्च को बैलेंस करना है, जबकि Q3 2026 में कंपनी का रेवेन्यू **25%** बढ़ा है।
दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Alphabet अब ग्लोबल स्तर पर अपने वर्कफोर्स में बदलाव कर रही है। कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान और स्विट्जरलैंड जैसे प्रमुख देशों में कंपनी ने वॉलंटरी बायआउट (voluntary buyout) प्रोग्राम लागू किया है। यह कदम मुख्य रूप से कंपनी के उस भारी-भरकम फाइनेंशियल कमिटमेंट को मैनेज करने के लिए उठाया गया है, जो उसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए किया है।
ग्रोथ और मुनाफे का संतुलन
कंपनी के सामने फिलहाल ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी के बीच संतुलन बनाए रखने की बड़ी चुनौती है। तीसरी तिमाही (Q3 2026) में Alphabet का रेवेन्यू $127.6 बिलियन रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 25% की बढ़त है। हालांकि, टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च का ग्राफ तेजी से ऊपर जा रहा है। साल 2026 के लिए कुल खर्च का अनुमान $195 बिलियन से $205 बिलियन के बीच है, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
रणनीति का हिस्सा: नॉन-कोर सेग्मेंट पर फोकस
कंपनी ने अपने मुख्य AI और क्लाउड डिवीजनों को इन एग्जिट प्रोग्राम से बाहर रखा है। इसका मतलब साफ है कि कंपनी का लक्ष्य सिर्फ नॉन-प्रायोरिटी एरियाज को स्ट्रीमलाइन करना है ताकि टैलेंट को हाई-ग्रोथ क्षेत्रों में री-एलोकेट किया जा सके। याद रहे कि पिछले छह महीनों में कंपनी ने 10,000 नए कर्मचारी जोड़े थे, जिसमें Wiz का अधिग्रहण भी शामिल था।
निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?
यह बदलाव यह दिखाता है कि वर्तमान AI रेस कितनी महंगी साबित हो रही है। हालांकि वॉलंटरी प्रोग्राम को छंटनी से बेहतर माना जा रहा है, लेकिन रिस्क यह है कि कंपनी नॉन-AI डिवीजनों में अपने स्पेशलाइज्ड टैलेंट को खो सकती है। इसके अलावा, कंपनी एक सिक्योरिटी फ्रॉड क्लास एक्शन मुकदमे का भी सामना कर रही है। अब निवेशकों की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या कंपनी बिना इनोवेशन को नुकसान पहुंचाए अपने ऑपरेटिंग खर्च को कंट्रोल कर पाएगी या नहीं।
