Google ने अमेरिका में अपना नया 'Universal Cart' फीचर पेश कर दिया है। इसके जरिए यूजर्स अब Search और Gemini के अंदर ही अलग-अलग रिटेलर्स के प्रोडक्ट्स को ट्रैक और मॉनिटर कर सकेंगे।
शॉपिंग का बदलता तरीका
Google अब सर्च इंजन से आगे बढ़कर एक एंड-टू-एंड शॉपिंग इंटरफेस बनने की ओर है। इस नए 'Universal Cart' के जरिए यूजर्स को अलग-अलग वेबसाइट्स पर जाकर प्राइज ड्रॉप या इन्वेंट्री चेक करने की जरूरत नहीं होगी। यह टूल Universal Commerce Protocol पर आधारित है, जो एक डिजिटल ब्रिज की तरह काम करता है। यह AI के जरिए रिटेल वेबसाइट्स से रियल-टाइम डेटा खींचता है और पेमेंट के लिए भी बेहतर सुझाव देता है।
निवेशकों के लिए बिजनेस मॉडल का बदलाव
अब तक Google का रेवेन्यू मुख्य रूप से विज्ञापनों और दूसरी वेबसाइट्स पर ट्रैफिक भेजने से आता था। लेकिन अब कंपनी यूजर्स को अपने इकोसिस्टम में ही रोककर रखना चाहती है। निवेशकों के लिए यह चिंता का विषय हो सकता है कि क्या यह मॉडल Google के पारंपरिक एड-क्लिक रेवेन्यू को नुकसान पहुंचाएगा?
चुनौतियां और रेगुलेटरी रिस्क
Google पहले ही अमेरिका और यूरोप में अपनी मार्केट डोमिनेंस को लेकर जांच के घेरे में है। सेंट्रलाइज्ड कॉमर्स अपनाने से उन पर खुद के टूल्स को बढ़ावा देने के आरोप लग सकते हैं। इसके अलावा, बड़े रिटेलर्स इस बात को लेकर आशंकित हो सकते हैं कि क्या वे Google के साथ अपना डेटा शेयर करना चाहेंगे, क्योंकि अंत में यह Google के कंट्रोल में आ जाएगा।
भारतीय निवेशकों के लिए अहम सबक
फिलहाल यह सुविधा अमेरिका तक सीमित है, लेकिन यदि यह भारत में आती है, तो Flipkart और Reliance Retail जैसे बड़े प्लेयर्स के लिए मुकाबला काफी दिलचस्प हो जाएगा। क्या Google यहाँ एक पार्टनर बनेगा या एक ऐसा कंपीटीटर जो डिजिटल शेल्फ पर कब्जा कर लेगा, यह देखना अब सबसे बड़ा 'मॉनिटरेबल' फैक्टर है।
