Alphabet ने अपने AI-पावर्ड सर्च टूल में फ्लाइट ट्रैकिंग और होटल बुकिंग जैसे फीचर्स जोड़ दिए हैं। यह कदम ट्रैवल प्लानिंग को आसान तो बनाता है, लेकिन कंपनी पर AI इन्फ्रास्ट्रक्चर में भारी खर्च और एंटीट्रस्ट कानूनों का दबाव भी बना हुआ है।
अब एक ही जगह पर सब कुछ
Google ने अपने AI-पावर्ड सर्च को एक फुल-स्टैक ट्रैवल टूल में बदल दिया है। अब यूजर्स 300 से ज्यादा एयरलाइन्स और होटल पार्टनर्स का डेटा सीधे सर्च इंटरफेस पर देख सकेंगे। इसमें न केवल फ्लाइट की कीमतें ट्रैक की जा सकेंगी, बल्कि लॉयल्टी पॉइंट्स की तुलना करना और सीधे होटल बुकिंग करना भी बेहद सरल हो गया है। यूजर्स अब Google Pay का इस्तेमाल करके ट्रांजेक्शन भी पूरा कर सकते हैं।
इकोसिस्टम और मोनेटाइजेशन की रणनीति
180 से ज्यादा देशों में अपनी सेवाएं फैलाकर Alphabet का लक्ष्य यूजर्स को अपने इकोसिस्टम में ही बनाए रखना है। हालांकि, बुकिंग के बाद की कस्टमर सर्विस और सपोर्ट अभी भी एयरलाइन्स और होटल्स के पास ही रहेगी, लेकिन यह कदम Google के लिए विज्ञापन और ट्रांजेक्शन आधारित रेवेन्यू को बढ़ाने में गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
निवेशकों के लिए चिंता का विषय
यह नया फीचर कंपनी की आक्रामक AI रणनीति का हिस्सा है। 2026 की दूसरी तिमाही में कंपनी ने $119.8 बिलियन का रेवेन्यू हासिल किया, जो सालाना आधार पर 24% की ग्रोथ दिखाता है। लेकिन, इसके साथ ही चिंताजनक पहलू है कंपनी का कैपिटल एक्सपेंडिचर, जो पिछले साल के मुकाबले 100% बढ़कर $44.9 बिलियन पहुंच गया है। इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हो रहा यह भारी खर्च निवेशकों के लिए फ्री कैश फ्लो को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
कानूनी और रेगुलेटरी रिस्क
AI के विस्तार के साथ ही कंपनी पर रेगुलेटरी दबाव भी बढ़ रहा है। European Economic Area समेत कई ग्लोबल अथॉरिटीज कंपनी के सर्च प्रैक्टिसेज और एंटीट्रस्ट मुद्दों पर कड़ी नजर रख रही हैं। इसके अलावा, कंपनी की $800 बिलियन से ज्यादा की कमिटमेंट्स को देखते हुए बाजार यह जानना चाहता है कि क्या AI पर किया गया यह भारी निवेश लंबे समय में सही रिटर्न दे पाएगा या नहीं।
