Agrani Labs: सरकारी मदद के बिना नहीं जीतेगी भारतीय डीपटेक की जंग, CEO ने सरकार से की ये अपील

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AuthorAditya Rao|Published at:
Agrani Labs: सरकारी मदद के बिना नहीं जीतेगी भारतीय डीपटेक की जंग, CEO ने सरकार से की ये अपील

Agrani Labs के CEO धीमंत नागराज का मानना है कि भारतीय डीपटेक स्टार्टअप्स को सस्ती कीमतों के बजाय ग्लोबल क्वालिटी पर फोकस करना चाहिए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि वह स्वदेशी तकनीक के लिए पहले 'फाउंडेशनल ग्राहक' बने ताकि स्टार्टअप्स वैश्विक दिग्गजों को टक्कर दे सकें।

ET स्टार्टअप अवार्ड्स 2026 के दौरान, बेंगलुरु स्थित सेमीकंडक्टर स्टार्टअप Agrani Labs के CEO धीमंत नागराज ने भारतीय डीपटेक सेक्टर की सबसे बड़ी चुनौती पर खुलकर बात की। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर भारतीय कंपनियों को ग्लोबल मार्केट में टिकना है, तो उन्हें सिर्फ प्राइस-वार (कीमत की प्रतिस्पर्धा) छोड़कर क्वालिटी के अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क को छूना होगा। यह बात डेटा सेंटर्स जैसे हाई-परफॉरमेंस सेक्टर में और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, जहां तकनीक की विश्वसनीयता और परफॉरमेंस के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

सरकारी वैलिडेशन का महत्व

नागराज का तर्क है कि भारतीय डीपटेक कंपनियां अक्सर ग्लोबल दिग्गजों के सामने इसलिए पिछड़ जाती हैं क्योंकि बाजार में उनके पास वर्षों का अनुभव और भरोसा होता है। इस बाधा को तोड़ने के लिए उन्होंने सरकार को सुझाव दिया है कि वह स्टार्टअप्स के लिए 'पहले ग्राहक' (First Customer) की भूमिका निभाए। यदि सरकार अपनी बुनियादी जरूरतों में स्वदेशी तकनीकों का उपयोग करती है, तो इससे तकनीक का रिस्क कम होगा और प्राइवेट क्लाइंट्स का भरोसा भी बढ़ेगा।

फंडिंग और चुनौतियां

साल 2024 में Intel और AMD के पूर्व अधिकारियों द्वारा स्थापित Agrani Labs फिलहाल सेमीकंडक्टर की भारी-भरकम दुनिया में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रही है। कंपनी पहले ही $8 मिलियन की सीड फंडिंग जुटा चुकी है और अब ₹800 करोड़ से ₹850 करोड़ तक की नई फंडिंग जुटाने पर विचार कर रही है, जिसका इस्तेमाल हाई-परफॉरमेंस AI GPUs बनाने के लिए किया जाएगा।

इस सेक्टर में कदम रखना आसान नहीं है। फुल-स्टैक AI सेमीकंडक्टर विकसित करने के लिए बहुत बड़े निवेश और लंबी अवधि की जरूरत होती है। बिना शुरुआती सरकारी समर्थन और रियल-वर्ल्ड एनवायरमेंट में टेस्टिंग के, घरेलू कंपनियों के लिए वैश्विक स्तर पर जगह बनाना मुश्किल हो सकता है।

आत्मनिर्भरता की ओर कदम

यह केवल कमर्शियल ग्रोथ का मामला नहीं है, बल्कि 'टेक्नोलॉजिकल सॉवरेन्टी' (तकनीकी संप्रभुता) की भी बात है। अपनी खुद की तकनीक विकसित करने से भारत अपनी बौद्धिक संपदा और सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर पर नियंत्रण रख सकेगा। हालांकि, इस रणनीति की सफलता पूरी तरह इस पर निर्भर करेगी कि भारतीय स्टार्टअप्स कितनी तेजी से ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के मुताबिक हार्डवेयर डिलीवर कर पाते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.