चेन्नई स्थित स्पेस स्टार्टअप Agnikul Cosmos अब अपने टेस्टिंग फेज से निकलकर कमर्शियल ऑपरेशंस की ओर बढ़ रहा है। कंपनी का लक्ष्य सालाना **100** रॉकेट लॉन्च करने का है, हालांकि कंपनी अभी भी घाटे में चल रही है और उसका भविष्य पूरी तरह से रियूजेबल रॉकेट टेक्नोलॉजी की सफलता पर टिका है।
कमर्शियल उड़ान की तैयारी
चेन्नई की स्पेस टेक कंपनी Agnikul Cosmos ने अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी अब केवल टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि कमर्शियल मार्केट में अपनी जगह बनाने के लिए कमर कस रही है। कंपनी का लक्ष्य साल में 100 रॉकेट मिशन पूरे करना है, जिसके लिए वे अब 'पैरेलल मैन्युफैक्चरिंग' मॉडल अपना रहे हैं।
डेडिकेटेड लॉन्च की रणनीति
आजकल ज्यादातर स्पेस ऑपरेटर्स 'राइडशेयर' मिशन पर निर्भर हैं, जहां एक ही रॉकेट में कई सैटेलाइट भेजे जाते हैं। लेकिन Agnikul का दावा है कि वे 'डेडिकेटेड लॉन्च' देंगे, जिससे सैटेलाइट्स को सीधे उनकी तय ऑर्बिट (Orbit) में भेजा जा सकेगा। इससे ग्राहकों का पैसा और समय दोनों बचेगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर और फाइनेंशियल हेल्थ
अपनी योजनाओं को पूरा करने के लिए कंपनी ने चेन्नई में दो नई फैसिलिटीज शुरू की हैं। हालांकि, फाइनेंशियल तौर पर कंपनी अभी 'बर्न फेज' में है। फाइनेंशियल ईयर 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी का रेवेन्यू ₹7.8 करोड़ रहा, जबकि नेट लॉस ₹54.8 करोड़ तक पहुंच गया। मार्च 2026 में मिली 'सीरीज सी' फंडिंग कंपनी को आगे बढ़ने का मौका तो दे रही है, लेकिन चुनौती अभी भी बड़ी है।
आगे की राह और रिस्क
कंपनी के लिए आने वाला समय बहुत अहम है। रियूजेबल ऑर्बिटल-क्लास बूस्टर बनाना एक बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती है। सभी की नजरें अब कंपनी के आगामी 'Mission-02' पर टिकी हैं। अगर यह सफल रहा, तो Agnikul के लिए कमर्शियल स्पेस मार्केट में खुद को साबित करना आसान हो जाएगा।
