भारतीय स्पेस स्टार्टअप AgniKul Cosmos ने 2027 की शुरुआत में अपना दूसरा मिशन लॉन्च करने की तैयारी कर ली है। कंपनी का लक्ष्य रॉकेट के निचले हिस्से को सफलतापूर्वक रिकवर करना है, जिसे 'रियूजेबल' बनाकर लॉन्चिंग की लागत को काफी कम किया जा सके।
रियूजेबल रॉकेट की ओर पहला कदम
चेन्नई स्थित स्पेस स्टार्टअप AgniKul Cosmos ने 2027 की शुरुआत में अपने दूसरे मिशन की घोषणा की है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य रॉकेट की रियूजेबिलिटी (पुन: प्रयोज्यता) का प्रदर्शन करना है। कंपनी का प्लान है कि वाणिज्यिक पेलोड को सफलतापूर्वक ऑर्बिट में स्थापित करने के बाद, रॉकेट के निचले हिस्से को बंगाल की खाड़ी में एक बार्ज (जहाज) पर वर्टिकल लैंडिंग कराकर रिकवर किया जाए।
तकनीक और पुन: प्रयोज्यता की रणनीति
पारंपरिक रॉकेट के विपरीत, AgniKul एक ऐसी आर्किटेक्चर पर काम कर रहा है जहाँ रॉकेट का निचला हिस्सा स्वतंत्र गाइडेंस और हार्डवेयर सिस्टम के साथ वापस उड़ान भरेगा। कंपनी के CEO श्रीनाथ रविचंद्रन ने बताया कि रियूजेबिलिटी तकनीक का अंतिम सत्यापन चल रहा है। कंपनी इस साल के अंत तक श्रीहरिकोटा स्थित लॉन्च साइट पर हार्डवेयर ले जाने की योजना बना रही है, हालांकि अंतिम समय-सीमा मौसम की स्थिति और नियामक मंजूरी पर निर्भर करेगी।
3D-प्रिंटिंग से उत्पादन क्षमता में इजाफा
AgniKul अपनी उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए 3D-प्रिंटिंग तकनीक का भरपूर उपयोग कर रहा है। IIT-मद्रास रिसर्च पार्क से संचालित, यह स्टार्टअप पूरी तरह से 3D-प्रिंटेड रॉकेट इंजन बनाने के लिए अपने विशेष मशीनों का उपयोग करता है। इस प्रक्रिया से हर 72 घंटे में एक पूरा इंजन तैयार हो जाता है, जिससे कंपनी के अनुसार विश्वसनीयता और उत्पादन में एकरूपता बढ़ती है। AgniKul तुथुकुडी के पास एक नई सुविधा भी तैयार कर रहा है, जिससे भविष्य में अधिक लॉन्च किए जा सकेंगे और रिफर्बिश्ड हार्डवेयर का उपयोग संभव होगा।
बाजार में स्थिति और इंडस्ट्री का परिदृश्य
भारतीय प्राइवेट स्पेस सेक्टर में इन दिनों काफी हलचल है। Skyroot Aerospace जैसी कंपनियां भी कमर्शियल ऑर्बिटल लॉन्च ऑपरेशन कर रही हैं। AgniKul का मानना है कि साथी कंपनियों की सफलता घरेलू सैटेलाइट लॉन्च सेवाओं की बढ़ती मांग का संकेत है। रियूजेबिलिटी का लक्ष्य रखकर, कंपनी अपने बेड़े की दक्षता बढ़ाना चाहती है। अनुमान है कि केवल 5 रॉकेटों को रिफर्बिशमेंट चक्र के माध्यम से 25 लॉन्च तक सपोर्ट किया जा सकता है।
हालांकि यह तकनीक लॉन्च लागत को कम करने में मददगार साबित हो सकती है, लेकिन कंपनी के सामने जटिल फ्लाइट हार्डवेयर रिकवरी और समुद्री वातावरण में वर्टिकल लैंडिंग जैसी चुनौतियां हैं। निवेशकों को कंपनी के इंजन क्लस्टर फायरिंग के टेस्ट रिजल्ट्स, तुथुकुडी सुविधा की तैयारी और 2027 के लॉन्च विंडो के लिए नियामक मंजूरी पर नजर रखनी चाहिए।
