Adobe ने अपनी जेनेरेटिव AI क्षमताओं को मजबूत करने के लिए भारतीय मार्केटिंग इंटेलिजेंस स्टार्टअप Rilo का अधिग्रहण कर लिया है। कंपनी इस तकनीक और Rilo की टीम को अपने कस्टमर एक्सपीरियंस सूट में इंटीग्रेट करेगी।
तकनीक और टीम का विलय
हालाँकि इस डील की वित्तीय जानकारी का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन Rilo की 6 सदस्यों वाली टीम और उनकी प्रोपराइटरी टेक्नोलॉजी अब सीधे Adobe के इकोसिस्टम का हिस्सा बन जाएगी। Rilo अब बाहरी ग्राहकों को अपनी सेवा देना बंद कर देगी क्योंकि उसका पूरा फोकस Adobe के मार्केटिंग सॉफ्टवेयर सूट को अपग्रेड करने पर होगा।
भारतीय इकोसिस्टम पर Adobe की नजर
2025 में स्थापित Rilo ने कम समय में ही कॉम्पिटिटर इंटेलिजेंस और कंटेंट रीपरपजिंग जैसे जटिल वर्कफ़्लो को आसान बनाने में ख्याति हासिल की थी। इससे पहले, इस स्टार्टअप ने PeakXV, DeVC और Day Zero Ventures जैसे निवेशकों से $10 मिलियन के वैल्यूएशन पर $1 मिलियन की फंडिंग जुटाई थी। यह Adobe का भारत में दूसरा बड़ा अधिग्रहण है, इससे पहले 2023 में कंपनी ने Rephrase.ai को खरीदा था।
बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा
जेनेरेटिव AI के बढ़ते दौर में Adobe पर Canva, Amazon, Google और Meta जैसे दिग्गजों से मुकाबला करने का दबाव है। Rilo के वर्कफ़्लो बिल्डर को जोड़ना Adobe की एक सोची-समझी रणनीति है, जिससे एंटरप्राइज क्लाइंट्स ChatGPT, Gemini और Claude जैसे AI प्लेटफॉर्म्स पर अपनी ब्रांड विजिबिलिटी को बेहतर बना सकें।
फाइनेंशियल हेल्थ और ब्रोकरेज आउटलुक
हालिया नतीजों में Adobe ने $6.62 बिलियन का शानदार रेवेन्यू दर्ज किया है। इस अधिग्रहण के बाद RBC Capital के एनालिस्ट्स ने स्टॉक पर अपना 'Outperform' रेटिंग बरकरार रखा है और टारगेट प्राइस को $285 से बढ़ाकर $315 कर दिया है। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी होगी कि कंपनी इस नई टेक्नोलॉजी को कितनी जल्दी अपने प्रोडक्ट्स में रोलआउट करती है और यह अधिग्रहण मार्केट शेयर बचाने में कितना कारगर साबित होता है।
