AdaniConneX विशाखापत्तनम में अपने **1-गीगावाट** डेटा सेंटर प्रोजेक्ट के लिए एयर-कूलिंग तकनीक अपना रही है, ताकि ताजे पानी की खपत को कम किया जा सके।
पर्यावरण और विकास का संतुलन
Adani Enterprises और EdgeConneX के जॉइंट वेंचर, AdaniConneX ने विशाखापत्तनम में अपने 1-गीगावाट के विशाल प्रोजेक्ट के लिए वाटर-इंटेंसिव कूलिंग टावर्स को अलविदा कह दिया है। यह कदम मुडासरलोवा जलाशय (Mudasarlova Reservoir) और कंबालकोंडा वन्यजीव अभयारण्य (Kambalakonda Wildlife Sanctuary) के पास पानी की भारी कमी को देखते हुए उठाया गया है।
क्यों है यह बदलाव जरूरी?
डेटा सेंटर भारी मात्रा में बिजली और पानी दोनों की खपत करते हैं। निवेशकों के नजरिए से, यह कदम कंपनी के 'सोशल लाइसेंस टू ऑपरेट' के लिए महत्वपूर्ण है। अगर कंपनी पानी जैसी स्थानीय समस्याओं को सुलझाने में नाकाम रहती, तो उसे प्रोजेक्ट में देरी और कानूनी बाधाओं का सामना करना पड़ सकता था।
कैसे काम करेगा यह नया सिस्टम?
इस प्रोजेक्ट में अब 'जीरो-डिस्चार्ज' पॉलिसी का पालन होगा। सर्वर कूलिंग के लिए हार्डवेयर पूरी तरह से एयर-बेस्ड तकनीक पर निर्भर रहेगा, जिससे मुंसिपल पाइपलाइन से आने वाले पानी पर दबाव नहीं पड़ेगा। कंपनी इंडस्ट्रियल वॉटर कनेक्शंस का इस्तेमाल करेगी, जिससे स्थानीय निवासियों को पानी की किल्लत नहीं होगी।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
हालांकि एयर-कूलिंग तकनीक में शुरूआती कैपिटल खर्च ज्यादा हो सकता है, लेकिन यह लंबे समय में नियामक बाधाओं को कम करने में मदद करेगा। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि क्या यह तकनीक कंपनी के लॉन्ग-टर्म मार्जिन पर असर डालती है, या समय पर प्रोजेक्ट पूरा होने से कंपनी को इसका फायदा मिलता है।
