आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने विशाखापत्तनम में बनने वाले **$15 बिलियन** के Google-Adani डेटा सेंटर प्रोजेक्ट को काम जारी रखने की अनुमति दे दी है, लेकिन एक बड़ी शर्त के साथ। कोर्ट ने साफ कहा है कि जो भी निर्माण कार्य होगा, उसका पूरा वित्तीय जोखिम (Financial Risk) डेवलपर का होगा।
कोर्ट की क्या है शर्त?
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने विशाखापत्तनम में बनने वाले विशाल डेटा सेंटर प्रोजेक्ट को फिलहाल राहत दी है, लेकिन यह राहत सशर्त है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि 'Vizag Hyperscale Data Center Park Ltd' जो भी निवेश या निर्माण कार्य करेगा, वह पूरी तरह से कंपनी के अपने जोखिम पर होगा। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर भविष्य में कोर्ट का फैसला प्रोजेक्ट के खिलाफ जाता है, तो कंपनी किसी भी प्रकार के मुआवजे या सुरक्षा का दावा नहीं कर पाएगी।
निवेशकों के लिए जोखिम (Impact on Capital)
इतने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में शुरुआती दौर में ही भारी पूंजी (Capital Expenditure) खर्च की जाती है। कोर्ट की इस टिप्पणी से शेयरधारकों के लिए अनिश्चितता बढ़ गई है। यदि कानूनी अड़चनों के कारण प्रोजेक्ट को रोकना पड़ा या उसमें बदलाव करना पड़ा, तो अभी किया गया निवेश 'संक कॉस्ट' (Sunk Cost) में बदल सकता है। निवेशकों को कंपनी के विस्तार और कानूनी जोखिमों के बीच के संतुलन पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।
विवाद के मुख्य बिंदु
यह मामला फिलहाल दो मोर्चों पर कानूनी लड़ाई का सामना कर रहा है:
- पर्यावरण मंजूरी (Environmental Clearance): याचिकाकर्ताओं का दावा है कि प्रोजेक्ट को 'Category B/B2' में गलत तरीके से रखा गया ताकि कड़ी पर्यावरण जांच से बचा जा सके। साथ ही, यह साइट कंबालाकोंडा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी के करीब है, जिसे लेकर पर्यावरणविदों को चिंता है।
- जमीन का विवाद (Land Dispute): प्रोजेक्ट की 160 एकड़ जमीन सिमहाचलम देवस्थानम (एक मंदिर ट्रस्ट) की थी, जिसके हस्तांतरण पर सवाल खड़े किए गए हैं।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की महत्वाकांक्षा
बावजूद कानूनी पेच के, यह प्रोजेक्ट Adani Group के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का एक अहम हिस्सा है। Google और Bharti Airtel के साथ मिलकर कंपनी 1 गीगावाट क्षमता का कैंपस तैयार कर रही है, जिसका लक्ष्य भारत में AI और क्लाउड कंप्यूटिंग की बढ़ती डिमांड को पूरा करना है। अब निवेशकों की नजरें कोर्ट की अगली सुनवाई और प्रोजेक्ट की टाइमलाइन पर टिकी होंगी।
