Acumatica का हैदराबाद में ग्लोबल सेंटर खुला, टेक इनोवेशन को मिलेगी रफ्तार

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AuthorNeha Patil|Published at:
Acumatica का हैदराबाद में ग्लोबल सेंटर खुला, टेक इनोवेशन को मिलेगी रफ्तार

क्लाउड ईआरपी (ERP) प्रदाता Acumatica ने हैदराबाद के नानकरामगुडा जिले में अपना नया ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) लॉन्च किया है। **30** से ज़्यादा कर्मचारियों के साथ शुरू हुई यह सुविधा इंजीनियरिंग और प्रोडक्ट डेवलपमेंट पर फोकस करेगी। Acumatica एक प्राइवेट कंपनी है, लेकिन इस कदम से वैश्विक स्तर पर कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने और भारत की इंजीनियरिंग प्रतिभा का लाभ उठाने की कंपनी की रणनीति साफ झलकती है।

क्लाउड-आधारित एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ERP) प्रदाता Acumatica ने हैदराबाद में अपना नया ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) शुरू कर दिया है। नानकरामगुडा टेक डिस्ट्रिक्ट में स्थित यह सेंटर कंपनी के अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशंस के विस्तार में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस सेंटर का लक्ष्य एक इंजीनियरिंग हब के रूप में काम करना है, जिसे कंपनी के क्लाउड सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट्स के डेवलपमेंट में तेजी लाने और विश्व स्तर पर कस्टमर सपोर्ट को बेहतर बनाने के लिए डिजाइन किया गया है।

हैदराबाद सेंटर ने 30 से ज़्यादा कर्मचारियों की शुरुआती टीम के साथ काम शुरू कर दिया है। इस नए सेंटर की स्थापना और ऑपरेशनल स्ट्रेटेजी को संभालने के लिए, Acumatica ने Summit Consulting Services के साथ पार्टनरशिप की है, जो ANSR ग्रुप का हिस्सा है। उम्मीद है कि यह पार्टनरशिप कंपनी को टैलेंट मार्केट में नेविगेट करने और भारत में अपने ऑपरेशंस को बढ़ाने में मदद करेगी, साथ ही इसे संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, सर्बिया और श्रीलंका में मौजूदा वर्कफोर्स के साथ इंटीग्रेट करेगी।

कंपनी के ग्रोथ पर नज़र रखने वालों के लिए यह जानना ज़रूरी है कि Acumatica एक प्राइवेट कंपनी के तौर पर काम करती है। 2025 में Vista Equity Partners द्वारा अधिग्रहण के बाद, Acumatica के शेयर पब्लिक मार्केट में ट्रेड नहीं होते हैं। नतीजतन, इस बिजनेस एक्सपेंशन का शेयर बाजारों या लिस्टेड एंटिटीज पर सीधा असर नहीं पड़ेगा।

इस नए सेंटर की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी शुरुआती इंजीनियरिंग फोकस से आगे बढ़कर अपने ऑपरेशंस को कैसे बढ़ा पाती है। भारत में सेंटर स्थापित करने वाले कई ग्लोबल ऑर्गनाइजेशन्स की तरह, Acumatica को भी टैलेंट रिटेंशन को मैनेज करना होगा और हैदराबाद-आधारित इंजीनियर्स और ग्लोबल प्रोडक्ट रोडमैप के बीच स्मूथ इंटीग्रेशन सुनिश्चित करना होगा। कंपनी की लॉन्ग-टर्म ऑपरेशनल प्रोग्रेस में रुचि रखने वाले निवेशक भविष्य में कर्मचारियों की संख्या में वृद्धि और हैदराबाद फैसिलिटी में हासिल किए गए स्पेसिफिक इंजीनियरिंग माइलस्टोन्स पर अपडेट की उम्मीद कर सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.