Accenture ने अपने निवेशकों को मिलने वाले कैश रिटर्न में कटौती का ऐलान किया है। कंपनी अब **$8 बिलियन** की राशि का इस्तेमाल AI और साइबर सिक्योरिटी क्षेत्र में अधिग्रहण (Acquisitions) के लिए करेगी। इस बड़े बदलाव के बाद शेयर में **15%** से ज्यादा की जबरदस्त तेजी देखी गई है।
ग्रोथ की ओर बड़ा कदम
Accenture ने अपनी फाइनेंशियल स्ट्रैटेजी में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने अब निवेशकों को दिए जाने वाले ऊंचे डिविडेंड और बायबैक प्रोग्राम के बजाय 'लॉन्ग-टर्म ग्रोथ' को प्राथमिकता देने का फैसला किया है। आगामी फाइनेंशियल ईयर के लिए कंपनी ने शेयरधारकों को $9.5 बिलियन लौटाने की योजना बनाई है, जो बीते फाइनेंशियल ईयर 2026 के $11.5 बिलियन से कम है। कंपनी इस अतिरिक्त नकदी का उपयोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सिक्योरिटी और डेटा सेंटर्स जैसे हाई-ग्रोथ सेक्टर में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए करेगी।
मार्केट का जबरदस्त रिएक्शन
कैश पेआउट में कमी के बावजूद, निवेशकों ने कंपनी के आक्रामक ग्रोथ आउटलुक का स्वागत किया है। 1 अक्टूबर 2026 को आए नतीजों के बाद कंपनी के शेयर 15% से 20% तक चढ़ गए। कंपनी का रेवेन्यू $18.68 बिलियन रहा, जिसमें साल-दर-साल 6% की बढ़ोतरी हुई है। रिकॉर्ड बुकिंग्स के चलते मैनेजमेंट ने शेयर बायबैक के बजाय अधिग्रहण पर फोकस करना बेहतर समझा है।
क्या है रिस्क?
यह 'इनऑर्गेनिक ग्रोथ' की रणनीति जोखिम से खाली नहीं है। कंपनी को उम्मीद है कि ये अधिग्रहण फाइनेंशियल ईयर 2027 में कुल रेवेन्यू ग्रोथ में 2% से 2.5% का योगदान देंगे। हालांकि, बढ़ता हुआ कर्ज और इन नई कंपनियों को अपने मौजूदा बिजनेस मॉडल के साथ इंटीग्रेट करने की चुनौती कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल सकती है।
भारतीय IT सेक्टर पर असर
Accenture के इस फैसले का भारतीय IT कंपनियों जैसे Tata Consultancy Services, Infosys और HCL Technologies पर भी गहरा असर पड़ सकता है। ग्लोबल ट्रेंड्स को देखते हुए, यदि डिमांड इसी तरह बनी रही तो भारतीय कंपनियों को भी डिविडेंड के बजाय रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) और टेक्नोलॉजी अधिग्रहणों पर ज्यादा खर्च करने का दबाव महसूस हो सकता है। निवेशकों के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या घरेलू कंपनियां भी इसी राह पर चलती हैं।
