ग्लोबल टेक दिग्गज Accenture एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। जनरेटिव AI के बढ़ते प्रभाव ने कंपनी के पुराने कंसल्टिंग मॉडल को मुश्किल में डाल दिया है, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
Accenture फिलहाल एक बड़े टर्निंग पॉइंट पर खड़ी है। दशकों से कंपनी जिस 'कंसल्टिंग पिरामिड' मॉडल पर काम कर रही थी, वह अब जनरेटिव AI के कारण खतरे में है। पहले जो टेक्निकल प्रोजेक्ट्स और डेटा एनालिसिस के लिए बड़ी मैनपावर की जरूरत होती थी, उसे अब AI टूल्स पलक झपकते ही पूरा कर रहे हैं।
शेयरधारकों के लिए सबसे बड़ा रिस्क
सबसे बड़ा खतरा यह है कि क्लाइंट्स अब AI की मदद से कम समय और कम खर्च में काम पूरा कर रहे हैं, जिससे कंसल्टेंट्स के 'बिलएबल आवर्स' (Billable Hours) घट रहे हैं। कंपनी की CEO Julie Sweet इसे एक अवसर के तौर पर देख रही हैं और साइबर सिक्योरिटी व AI पार्टनरशिप में भारी निवेश कर रही हैं। लेकिन अभी तक ये निवेश फाइनेंशियल नतीजों में तब्दीली नहीं ला सके हैं। हालिया डेटा के मुताबिक, कंपनी की नई बुकिंग्स में सुस्ती और मैनेज्ड-सर्विसेज कॉन्ट्रैक्ट्स में गिरावट देखी गई है।
रिस्ट्रक्चरिंग और छंटनी का दौर
कंपनी अपने 8,00,000 कर्मचारियों को रिट्रेन (Retrain) कर रही है ताकि वे AI के साथ तालमेल बिठा सकें। साथ ही, उन लोगों को भी बाहर किया जा रहा है जो नई टेक्नोलॉजी को नहीं अपना पा रहे हैं। हालांकि, यह कंपनी के लिए एक नाजुक संतुलन है क्योंकि उसे कोर बिजनेस को बचाए रखना है जो अभी भी उसकी कमाई का मुख्य जरिया है।
निवेशक अब कंपनी के अगले क्वार्टरली नतीजों पर नजर गड़ाए हुए हैं। मार्केट को इस बात का सबूत चाहिए कि AI से होने वाली कमाई, पुरानी लेबर-बेस्ड कॉन्ट्रैक्ट्स से हो रहे नुकसान की भरपाई कर पाएगी या नहीं।
