भारत के फिनटेक (Fintech) सेक्टर में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। ASSOCHAM और KPMG की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ ऑटोमेशन (automation) के लिए इस्तेमाल होने वाले टूल से आगे बढ़कर एक 'कोर इंटेलिजेंस लेयर' बन गई है। इसका मकसद लेंडिंग, फ्रॉड डिटेक्शन और कस्टमर सर्विस को और बेहतर बनाना है।
फिनटेक के लिए AI का नया अवतार
ASSOCHAM और KPMG की 'Beyond digital infrastructure' नाम की यह रिपोर्ट बताती है कि AI अब भारतीय वित्तीय सेवाओं के लिए एक सपोर्ट सिस्टम की जगह, एक मुख्य 'दिमाग' की तरह काम कर रही है। अब इसका इस्तेमाल सिर्फ मौजूदा कामों को आसान बनाने के लिए नहीं, बल्कि वित्तीय सेवाओं को और ऑटोमेटेड (automated) और स्मार्ट बनाने के लिए हो रहा है।
भारत में AI के लिए मजबूत नींव
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत इस बदलाव में सबसे आगे रहने के लिए अच्छी स्थिति में है। इसकी वजह है देश का मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), जिसमें डिजिटल पहचान, रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम और सुरक्षित डेटा स्टोरेज जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इसी मजबूत नींव पर AI को बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकता है, जिससे ज़्यादा इंटेलिजेंट और असरदार फाइनेंशियल प्रोडक्ट बनाए जा सकेंगे।
फाइनेंस में AI के प्रैक्टिकल इस्तेमाल
फाइनेंशियल कंपनियां अब AI को सिर्फ शुरुआती प्रयोगों तक सीमित नहीं रख रही हैं, बल्कि इसे अपने अहम ऑपरेशन्स में शामिल कर रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, AI का इस्तेमाल अब ज़्यादा परिष्कृत फ्रॉड डिटेक्शन (fraud detection), बेहतर रिस्क मैनेजमेंट (risk management) और लेंडिंग के लिए अंडरराइटिंग (underwriting) प्रक्रियाओं को और कुशल बनाने में हो रहा है। साथ ही, वॉयस-फर्स्ट (voice-first) और क्षेत्रीय भाषाओं जैसे समावेशी इंटरफेस (inclusive interfaces) को बढ़ावा देकर वित्तीय सेवाओं तक लोगों की पहुंच बढ़ाने की भी कोशिशें हो रही हैं।
निवेशकों के लिए जोखिम और ध्यान देने योग्य बातें
AI-नेटिव मॉडल अपनाने से जहां फायदे हैं, वहीं कुछ परिचालन संबंधी चुनौतियां भी हैं जिन पर निवेशकों को ध्यान देना होगा। सबसे बड़ी चिंता कंप्यूट कैपेसिटी (compute capacity) की बढ़ती जरूरत है, जिसके लिए टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े और लगातार निवेश की आवश्यकता होगी। इसके अलावा, जैसे-जैसे कंपनियां AI को अपने सिस्टम में गहराई से एकीकृत करेंगी, साइबर सुरक्षा (cybersecurity) और डेटा प्राइवेसी (data privacy) के जोखिम भी बढ़ेंगे, जिसके लिए मज़बूत गवर्नेंस (governance) और निगरानी की ज़रूरत होगी।
बाजार के लिए, यह सवाल नहीं है कि कोई कंपनी AI अपना रही है या नहीं, बल्कि यह है कि वह इसे कैसे लागू कर रही है। कंपनियों के लिए भविष्य में सबसे महत्वपूर्ण यह देखना होगा कि वे इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने की लागत का प्रबंधन कैसे करती हैं, साथ ही सुरक्षा और नियमों का पालन भी सुनिश्चित करती हैं। फिनटेक सेक्टर का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां कच्चे डेटा को बिना प्राइवेसी से समझौता किए या अत्यधिक कर्ज और परिचालन अक्षमता पैदा किए, एक्शन-योग्य बिजनेस आउटकम में कितनी प्रभावी ढंग से बदल पाती हैं।
