ग्लोबल सेमीकंडक्टर दिग्गज ASML भारत में अपने ऑपरेशंस का विस्तार कर रही है। कंपनी गुजरात में Tata Electronics की आने वाली सेमीकंडक्टर फैब यूनिट को सपोर्ट करेगी, जहां **2028** तक प्रोडक्शन शुरू करने का लक्ष्य है।
सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री की बड़ी खिलाड़ी ASML अब भारत पर अपना फोकस बढ़ा रही है। कंपनी का पूरा ध्यान फिलहाल गुजरात में Tata Electronics की 300mm वेफर फैब यूनिट को सफल बनाने पर है। ASML अब केवल एक वेंडर की भूमिका से आगे बढ़कर एक इकोसिस्टम पार्टनर बनने की तैयारी में है। इसके लिए कंपनी इंजीनियरिंग और मेंटेनेंस जैसी लोकल सपोर्ट स्ट्रक्चर तैयार करेगी ताकि 2028 के प्रोडक्शन टारगेट को पूरा किया जा सके।
DUV सिस्टम्स और कॉस्ट स्ट्रैटेजी पर जोर
अपनी एडवांस्ड EUV तकनीक के लिए मशहूर ASML भारत में फिलहाल DUV लिथोग्राफी और इंस्पेक्शन इक्विपमेंट पर ध्यान केंद्रित करेगी। 28nm और उससे ऊपर के प्रोसेस नोड्स की भारत में काफी डिमांड है, जिसका उपयोग पावर, सेंसर्स और एनालॉग चिप्स बनाने में होता है। नए प्लेयर्स पर बढ़ते वित्तीय दबाव को कम करने के लिए ASML नए उपकरणों के साथ-साथ रिफर्बिश्ड मशीनों का विकल्प भी देख रही है। यह रणनीति 2035 तक भारत की 50% सेमीकंडक्टर डिमांड को घरेलू स्तर पर पूरा करने के सरकारी लक्ष्य में अहम साबित होगी।
सप्लाई चेन की चुनौतियां
भारत के $120 बिलियन के सेमीकंडक्टर मार्केट के सपने के बावजूद, ASML फिलहाल भारत में मैन्युफैक्चरिंग शुरू नहीं करने वाली है। मैनेजमेंट का मानना है कि देश में अभी एक मैच्योर सप्लाई चेन का अभाव है, जो प्रोडक्शन के लिए सबसे बड़ी बाधा है। गुजरात का यह प्रोजेक्ट आने वाले समय में भारतीय सेमीकंडक्टर स्पेस के लिए एक बेंचमार्क की तरह काम करेगा।
