ग्लोबल सेमीकंडक्टर दिग्गज ASML ने भारत में अपना परिचालन शुरू कर दिया है। फिलहाल कंपनी का फोकस टेक्निकल सपोर्ट पर है, लेकिन कंपनी ने साफ कर दिया है कि उसका भविष्य का विस्तार Tata Electronics के Dholera Fab प्रोजेक्ट की सफलता पर निर्भर करेगा।
सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल होने वाली लिथोग्राफी मशीनों की दिग्गज कंपनी ASML ने अब आधिकारिक तौर पर भारत में अपना दफ्तर खोल लिया है। कंपनी ने शुरुआत में 20-30 इंजीनियर्स की एक छोटी टीम के साथ काम शुरू किया है, जिसका मुख्य काम ग्राहकों को टेक्निकल सपोर्ट देना है। अभी कंपनी का कोई मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने का इरादा नहीं है।
टाटा का Dholera Fab एक बड़ा बेंचमार्क
निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि ASML ने अपनी भविष्य की योजनाओं को सीधे तौर पर Tata Electronics के Dholera प्रोजेक्ट से जोड़ा है। यह फैब यूनिट भारत के चिप-मेकिंग सपनों का सबसे बड़ा टेस्ट केस है। यह प्लांट प्रति माह 50,000 वेफर्स प्रोसेस करने की क्षमता के साथ 2028 में शुरू होने वाला है। ASML का मानना है कि भारत की मैन्युफैक्चरिंग वैल्यू चेन में आगे बढ़ने के लिए इस शुरुआती प्रोजेक्ट का प्रोडक्शन टाइमलाइन और क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पर खरा उतरना बेहद जरूरी है।
इकोसिस्टम बनाने की चुनौती
भारत सरकार ने Semicon 2.0 पॉलिसी के तहत करीब ₹1.27 लाख करोड़ का इंसेंटिव देने का ऐलान किया है। हालांकि, ASML का कहना है कि 2032 तक देश की 15-25% डिमांड को घरेलू स्तर पर पूरा करने और 2035 तक इसे 35-50% तक ले जाने के लिए सिर्फ एक नहीं, बल्कि करीब एक दर्जन बड़े फैब्स की जरूरत होगी।
सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में कोई भी फैक्ट्री अकेले काम नहीं कर सकती; इसके लिए एक जटिल सप्लाई चेन, स्किल्ड वर्कफोर्स और बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का सही तालमेल होना जरूरी है। फिलहाल, टाटा ग्रुप वेन्डर पार्क बनाने पर काम कर रहा है, लेकिन ग्लोबल सप्लायर्स की नजर इस बात पर है कि धरातल पर काम कितनी तेजी से आगे बढ़ता है। ASML का भारत में कदम रखना एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन बड़ी पूंजी निवेश के लिए कंपनी अब Dholera प्रोजेक्ट के नतीजों का इंतजार करेगी।
