Cognizant की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, AI भारत की GDP में **$84 बिलियन** तक का इजाफा कर सकता है, लेकिन हकीकत में 91% कंपनियों को इससे तुरंत कोई रेवेन्यू फायदा नहीं मिल रहा है। इस 'ROI डिस्कनेक्ट' के चलते कई कंपनियां अपने AI प्रोजेक्ट्स को बीच में ही रोक रही हैं।
उत्पादकता और मुनाफे के बीच बड़ा गैप
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर माना जा रहा है, जिसकी मदद से GDP में सालाना $28 बिलियन से $84 बिलियन तक की बढ़त हो सकती है। लेकिन, Cognizant द्वारा 700 कर्मचारियों और 75 कॉर्पोरेट लीडर्स के बीच किए गए सर्वे में एक कड़वा सच सामने आया है।
डेटा बताते हैं कि हेल्थकेयर, कम्युनिकेशन और टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टरों में कर्मचारियों की कार्यक्षमता 28% से 38% तक बढ़ी है। इसके बावजूद, 84% लीडर्स का कहना है कि उनके ऑपरेशनल कॉस्ट में कोई कमी नहीं आई है और 91% ने माना कि AI के उपयोग से उनके रेवेन्यू पर कोई तुरंत असर नहीं पड़ा है।
क्यों ठप हो रहे हैं AI प्रोजेक्ट्स?
AI इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टाफ ट्रेनिंग पर होने वाले भारी निवेश के बदले तुरंत रिटर्न न मिलने से कंपनियां दबाव में हैं। यही वजह है कि सर्वे में शामिल 37% कंपनियों ने या तो अपने AI प्रोजेक्ट्स को कुछ समय के लिए 'पॉज' कर दिया है या पूरी तरह बंद कर दिया है। यह स्थिति साबित करती है कि केवल टास्क की दक्षता ही काफी नहीं है, बल्कि AI को असली बिजनेस वैल्यू (ROI) में बदलना एक बड़ी चुनौती है।
IT सेक्टर के लिए क्या हैं मायने?
भारत के IT सर्विसेज सेक्टर के लिए यह एक बड़ा सबक है। Cognizant India के एमडी राजेश वरियर के मुताबिक, अब कंपनियों को सिर्फ टेक्नोलॉजी लगाने से आगे बढ़ना होगा। भविष्य में सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि IT कंपनियां अपने क्लाइंट्स को उत्पादकता के बजाय सीधे तौर पर प्रॉफिट मार्जिन और रेवेन्यू में बढ़त कैसे दिखाती हैं। निवेशकों के लिए अब यही देखना जरूरी होगा कि कौन सी कंपनियां AI के प्रयोगों से निकलकर असल फाइनेंशियल नतीजों तक पहुंच पाती हैं।
