AlphaGrep Mutual Fund के CEO, Bhautik Ambani का मानना है कि 2027 तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में निवेश का नज़रिया बदलेगा। अब इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च से आगे बढ़कर असली रेवेन्यू जनरेशन पर फोकस होगा। यानी, निवेशक अब ग्रोथ की कहानियों से ज़्यादा, ठोस कमाई दिखाने वाली कंपनियों को तरजीह देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय IT सेक्टर में कमाई में गिरावट का दौर थम रहा है और वैल्यूएशन भी अब ज़्यादा टिकाऊ स्तर पर पहुँच गए हैं।
AI में अब दिखेगा असली खेल: इंफ्रास्ट्रक्चर से रेवेन्यू की ओर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में निवेश का तरीका बदलने वाला है। अब सिर्फ भारी-भरकम खर्चों पर नज़रें नहीं रहेंगी, बल्कि कंपनियां AI से कितना पैसा कमा पा रही हैं, इस पर ध्यान दिया जाएगा। AlphaGrep Mutual Fund के CEO, Bhautik Ambani के मुताबिक, 2027 तक बाजार का फोकस पूरी तरह से उन कंपनियों पर आ जाएगा जो AI की अपनी क्षमताओं को लगातार आमदनी (Revenue) में बदल सकती हैं।
फिलहाल, AI में ज़्यादातर निवेश डेटा सेंटर और खास हार्डवेयर जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में हो रहा है। लेकिन आने वाले समय में, AI का इस्तेमाल सॉफ्टवेयर, हेल्थकेयर और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में कितना उपयोगी साबित होता है, यह कंपनियों के चयन का मुख्य आधार बनेगा। निवेशकों को उन बिजनेस पर दांव लगाना चाहिए जो प्रोडक्टिविटी और बॉटम-लाइन ग्रोथ में साफ सुधार दिखा रहे हैं, न कि सिर्फ AI के संभावित इस्तेमाल बताने वाली कंपनियों पर।
IT सेक्टर और बिजली का बढ़ता इस्तेमाल
भारतीय निवेशकों के लिए IT सेक्टर पर Ambani की टिप्पणी काफी अहम है। उनका इशारा है कि IT स्टॉक्स की वैल्यूएशन पर जो कमाई में गिरावट का दबाव था, वो अब काफी हद तक कम हो गया है। हालांकि, उन्होंने तुरंत किसी बड़ी उछाल की उम्मीद नहीं जताई है, पर उनका मानना है कि मीडियम टर्म को देखते हुए मौजूदा वैल्यूएशन निवेशकों के लिए ज़्यादा वाजिब हैं। यह इस व्यापक ट्रेंड के अनुरूप है कि यह सेक्टर ग्लोबल AI इकोसिस्टम में अपनी भूमिका साबित करना चाहता है।
इसके अलावा, इलेक्ट्रिफिकेशन (Electrification) यानी बिजली से चलने वाली चीजों का ट्रेंड लंबी अवधि की ग्रोथ का एक अहम हिस्सा बना रहेगा। AI डेटा सेंटर भले ही बिजली की बड़ी खपत करते हों, लेकिन ये ग्लोबल एनर्जी ट्रांज़िशन का सिर्फ एक पहलू हैं। ग्रिड का आधुनिकीकरण और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का बढ़ता चलन, AI से जुड़े खर्चों में उतार-चढ़ाव के बावजूद ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करते रहेंगे।
मैक्रो इकोनॉमिक्स और जोखिम
भारत अपनी मजबूत ग्रोथ और घरेलू मांग के दम पर इंटरनेशनल कैपिटल के लिए अभी भी आकर्षक बना हुआ है। हालांकि, बाजार के प्रदर्शन को मैक्रो इकोनॉमिक कंडीशन (Macroeconomic Conditions) काफी हद तक प्रभावित करेंगी। ग्लोबल इंटरेस्ट रेट्स (Interest Rates) में गिरावट और एक स्थिर डॉलर को विदेशी निवेश बढ़ाने वाला फैक्टर माना जा रहा है।
इसके विपरीत, भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) और कच्चे तेल की कीमतें (Crude Oil Prices) इस आउटलुक के लिए सबसे बड़े जोखिम बने हुए हैं। चूंकि भारत एक बड़ा एनर्जी इम्पोर्टर (Energy Importer) है, तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ सकती है, जो ब्याज दरों और विभिन्न सेक्टर्स में कॉर्पोरेट मार्जिन को प्रभावित कर सकती है। इन थीम्स पर नज़र रखने वाले निवेशकों को AI डिप्लॉयमेंट में कंपनी-विशिष्ट प्रगति, IT सेक्टर में कमाई की रिकवरी की टाइमलाइन और ग्लोबल कमोडिटी की कीमतों के उतार-चढ़ाव पर कड़ी नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि यही अगले दौर में मार्केट लीडरशिप तय करेंगे।
