AI चैटबॉट जैसे ChatGPT का इस्तेमाल इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग के लिए करना डेटा सुरक्षा और कैलकुलेशन में बड़ी गड़बड़ियों का जोखिम बढ़ा सकता है। ये चैटबॉट सामान्य कामों में मदद तो कर सकते हैं, लेकिन टैक्स के जटिल नियमों को समझने में अक्सर चूक कर जाते हैं। सभी गलतियों के लिए टैक्सपेयर ही जिम्मेदार होगा, इसलिए किसी पेशेवर की सलाह या विशेष टैक्स सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल अनिवार्य है।
क्या है पूरा मामला?
जैसे-जैसे भारत में इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग का सीज़न आगे बढ़ रहा है, कई टैक्सपेयर OpenAI के ChatGPT और Anthropic के Claude जैसे सामान्य AI टूल्स का इस्तेमाल अपने ITR तैयार करने के लिए कर रहे हैं। हालांकि ये टूल्स सामान्य कामों के लिए फटाफट कैलकुलेशन कर देते हैं, लेकिन इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स और टैक्स प्रोफेशनल्स ने इस पर चिंता जताई है। मुख्य चिंता यह है कि ये AI मॉडल भारतीय इनकम टैक्स एक्ट की जटिलताओं को समझने के लिए नहीं बने हैं, जिससे कैलकुलेशन में गड़बड़ियां और डेटा सुरक्षा में बड़ी कमजोरियां पैदा हो सकती हैं।
डेटा सुरक्षा का जाल
टैक्स फाइलिंग के लिए पब्लिक AI चैटबॉट इस्तेमाल करने का सबसे गंभीर मुद्दा डेटा प्राइवेसी है। जब यूजर संवेदनशील फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट्स, जैसे - Form 16, सैलरी स्लिप या इन्वेस्टमेंट स्टेटमेंट्स को एक सामान्य AI इंटरफेस में अपलोड करते हैं, तो वह डेटा AI प्रोवाइडर द्वारा भविष्य के मॉडल को ट्रेन करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे PAN डिटेल्स और बैंक अकाउंट नंबर जैसी बेहद निजी जानकारी के लीक होने का खतरा बढ़ जाता है। खास फाइनेंशियल सॉफ्टवेयर के विपरीत, पब्लिक चैटबॉट में आमतौर पर टैक्सपेयर की जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी एंटरप्राइज-ग्रेड सिक्योरिटी और एन्क्रिप्शन प्रोटोकॉल नहीं होते हैं।
टैक्स कानूनों को समझने में AI की दिक्कतें
टैक्स फाइलिंग सिर्फ गणित का खेल नहीं है। इसके लिए टैक्स रेजिडेंसी स्टेटस, आय के स्रोत, कैपिटल गेन्स और डिस्क्लोजर की जरूरतों की गहरी समझ होनी चाहिए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सामान्य AI टूल्स में अक्सर फाइनेंशियल डेटा को सटीक रूप से प्रोसेस करने के लिए अपडेटेड, फिक्स्ड कंप्लायंस लॉजिक की कमी होती है।
उदाहरण के लिए, यदि कोई टैक्सपेयर AI से इंटरेस्ट इनकम की गणना करने के लिए कहता है, तो मॉडल यह नहीं समझ सकता कि रिपोर्टिंग एक्यूरल बेसिस पर होनी चाहिए या रिसिप्ट बेसिस पर। ऐसी विसंगतियों के कारण गलत ITR फॉर्म का चुनाव या आय की कम रिपोर्टिंग हो सकती है। इन गलतियों के कारण अक्सर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से ऑटोमेटेड स्क्रूटनी और नोटिस आते हैं, जिससे पेनाल्टी लग सकती है या फिर समय लेने वाली रिवाइज्ड फाइलिंग करनी पड़ सकती है।
कानूनी जिम्मेदारी हमेशा आपकी
यह समझना टैक्सपेयर्स के लिए बेहद जरूरी है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट AI को फाइलिंग एजेंट के तौर पर मान्यता नहीं देता है। ITR में किसी भी गलती, चूक या गलत रिपोर्टिंग की पूरी कानूनी जिम्मेदारी पूरी तरह से व्यक्तिगत टैक्सपेयर की होती है। भले ही AI टूल से गणना में कोई गलती हो जाए, विसंगति के लिए टैक्सपेयर को ही जिम्मेदार ठहराया जाएगा। AI चैटबॉट गलत सलाह या डेटा प्रोसेसिंग में विफलता के लिए जवाबदेह नहीं हो सकता, इसलिए अंतिम मानवीय समीक्षा एक अनिवार्य सुरक्षा उपाय है।
सामान्य चैटबॉट बनाम खास टैक्स प्लेटफॉर्म
ओपन-एक्सेस AI मॉडल और विशेष टैक्स-फाइलिंग प्लेटफॉर्म के बीच एक बड़ा अंतर है। विशेष टैक्स प्लेटफॉर्म को खास टैक्स कंप्लायंस वर्कफ़्लो के साथ बनाया जाता है और वे सुरक्षित APIs के माध्यम से सीधे आधिकारिक पोर्टल्स से इंटीग्रेट होते हैं। ये प्लेटफॉर्म डेटा को मान्य करने, स्थिरता सुनिश्चित करने और वर्तमान टैक्स नियमों का पालन करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि यदि टैक्सपेयर AI का उपयोग करना चाहते हैं, तो इसे एक सहायक टूल के रूप में देखा जाना चाहिए - ऑटोपायलट के बजाय को-पायलट के तौर पर। ऐसे व्यक्ति जिनके पास फॉरेन एसेट्स, कई आय स्रोत या क्रिप्टोकरेंसी होल्डिंग्स सहित जटिल फाइनेंशियल प्रोफाइल हैं, उनके लिए केवल सामान्य AI पर निर्भर रहना अनुशंसित नहीं है। सबसे सुरक्षित तरीका वेरिफाइड, टैक्स-कंप्लायंट सॉफ्टवेयर का उपयोग करना या सटीकता और कंप्लायंस सुनिश्चित करने के लिए किसी योग्य टैक्स प्रोफेशनल से सलाह लेना है।
