AI स्टार्टअप Instinct ने अपने एजेंट्स के लिए ऑटोनॉमस ईमेल फीचर पेश किया है, जो बुकिंग और रजिस्ट्रेशन जैसे काम खुद कर सकेंगे। हालांकि, यह कंपनी अभी प्राइवेट है और डेटा प्राइवेसी को लेकर सवालों के घेरे में है।
काम को आसान बनाने की नई तकनीक
सैन फ्रांसिस्को स्थित AI स्टार्टअप Instinct ने अपने पर्सनल असिस्टेंट में बड़ा बदलाव किया है। अब कंपनी के AI एजेंट्स के पास डेडिकेटेड और ऑटोनॉमस ईमेल एड्रेस होंगे। यह नई सुविधा AI को ऑनलाइन सेवाओं के लिए खुद रजिस्टर करने, वेंडर से बातचीत करने और कस्टमर सपोर्ट थ्रेड्स को मैनेज करने की आजादी देती है, जिससे यूजर का मैनुअल काम काफी कम हो जाएगा।
क्या भारतीय निवेशकों के लिए कोई मौका है?
भारतीय निवेशकों को यह नोट करना चाहिए कि Instinct एक प्राइवेट कंपनी है और यह NSE या BSE पर लिस्टेड नहीं है। कंपनी ने हाल ही में $250 मिलियन की सीरीज-बी फंडिंग जुटाई है, जिसके बाद इसकी वैल्यूएशन $2.5 बिलियन हो गई है। अब तक कंपनी कुल $350 मिलियन जुटा चुकी है और इसे Index Ventures और Benchmark जैसे बड़े वेंचर कैपिटल फर्म्स का समर्थन प्राप्त है।
कामकाज का तरीका और रिस्क
कंपनी अब साधारण चैट इंटरफेस से आगे बढ़कर ऐसे एजेंट्स बना रही है जो यूजर के डिजिटल प्रॉक्सी के रूप में काम करें। इसके लिए 1Password और Stripe जैसे टूल्स के साथ इंटीग्रेशन किया गया है ताकि पेमेंट और क्रेडेंशियल्स को मैनेज किया जा सके।
हालांकि, बिना मानवीय निगरानी के निर्णय लेने वाले इन 'ऑटोनॉमस एजेंट्स' के साथ सुरक्षा जोखिम भी हैं। अगर AI यूजर के निर्देशों को गलत समझता है, तो बुकिंग या खरीदारी में बड़ी गलती हो सकती है। इसके अलावा, कंपनी की टर्म्स ऑफ सर्विस को लेकर डेटा प्राइवेसी पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि कंपनी पर अपने AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए यूजर डेटा का इस्तेमाल करने के आरोप लगते रहे हैं। भविष्य में कंपनी कैसे डेटा सुरक्षा और रेगुलेटरी नियमों का पालन करती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
