AI सेक्टर में बड़ा धमाका हुआ है। स्टार्टअप Instinct ने सिर्फ एक महीने के भीतर अपनी वैल्यूएशन को $2.5 बिलियन से बढ़ाकर $10 बिलियन कर लिया है। कंपनी ने सीरीज C राउंड में $1 बिलियन की बड़ी फंडिंग हासिल की है, लेकिन तेजी से बढ़ती इस कंपनी के सामने डेटा प्राइवेसी और Meta जैसे दिग्गजों से जुड़ी चुनौतियां भी हैं।
वैल्यूएशन की रेस और बिजनेस मॉडल
Instinct ने अपनी इस उपलब्धि से पूरे मार्केट को चौंका दिया है। कंपनी को Sequoia Capital, Benchmark Capital और Coatue जैसे बड़े वेंचर कैपिटल फर्म्स का साथ मिला है। यह स्टार्टअप साधारण चैटबॉट्स से अलग काम करता है; इसके AI एजेंट्स बिल भुगतान, ट्रैवल बुकिंग और सब्सक्रिप्शन मैनेजमेंट जैसे फिजिकल काम आसानी से कर सकते हैं। इनकी सबसे खास सर्विस 'कॉन्सिएर्ज' है, जो आपके लिए फोन कॉल तक कर सकती है। फिलहाल यह कंपनी ऐप के बजाय टेक्स्ट और SMS के जरिए अपनी सेवाएं दे रही है।
Big Tech से कड़ी टक्कर
कंपनी के लिए रास्ता आसान नहीं है। Meta ने हाल ही में अपना AI टूल 'Muse' लॉन्च किया है। चूंकि Muse पहले से ही Instagram और Facebook जैसे प्लेटफॉर्म्स से जुड़ा है, इसलिए करोड़ों यूजर्स तक इसकी पहुंच Instinct के मुकाबले कहीं ज्यादा आसान है। Meta के पास मौजूद डेटा और इकोसिस्टम Instinct के लिए भविष्य में एक बड़ी बाधा बन सकते हैं।
प्राइवेसी और रिस्क का सवाल
निवेशकों की चिंता का सबसे बड़ा कारण डेटा प्राइवेसी है। चूंकि Instinct के AI एजेंट्स को यूजर के निजी और फाइनेंशियल अकाउंट्स का एक्सेस चाहिए होता है, इसलिए रेगुलेटर्स और यूजर्स दोनों ही सतर्क हैं। कंपनी को अपने शुरुआती प्राइवेसी नियमों को भी बदलना पड़ा था। इसके अलावा, कंपनी ने अब तक अपने एक्टिव यूजर ग्रोथ के आंकड़े साझा नहीं किए हैं, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह वैल्यूएशन टिकाऊ है या सिर्फ AI के नाम पर बना हुआ मार्केट हाइप है। आने वाले समय में कंपनी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह कैसे अपनी प्राइवेसी और सिक्योरिटी को भरोसेमंद बनाए रखती है।
