आम यूजर्स के बीच AI का क्रेज सिर्फ **2%** पर अटका है, जबकि साल 2026 में कंपनियों ने एंटरप्राइज AI पर **$186 बिलियन** खर्च किए हैं। इस बदलाव ने IPO बाजार को ठंडा कर दिया है, जिससे Oura जैसे बड़े नामों को अपने लिस्टिंग प्लान टालने पड़ रहे हैं।
टेक्नोलॉजी सेक्टर इस समय एक अजीब मोड़ पर है। जहाँ एक तरफ आम लोगों के बीच AI टूल्स का इस्तेमाल 2% से 2.2% के बीच स्थिर हो गया है, वहीं कॉर्पोरेट जगत में होड़ मची है। पिछले साल के मुकाबले एंटरप्राइज AI पर होने वाले खर्च में 47% का उछाल आया है और यह आंकड़ा $186 बिलियन तक पहुँच गया है।
इंडस्ट्रियल यूटिलिटी की ओर झुकाव
आम यूजर्स के लिए AI चैटबॉट्स का आकर्षण अब कम होता दिख रहा है, जिसे एक्सपर्ट्स 'लीकी बकेट' (leaky bucket) मॉडल कह रहे हैं। कंपनियों ने इसे भांप लिया है और अब वे अपना फोकस सप्लाई चेन ऑटोमेशन और कॉस्ट कटिंग जैसे बिजनेस सॉल्यूशंस पर शिफ्ट कर रही हैं, क्योंकि यहीं से मुनाफे (Profitability) का रास्ता साफ दिख रहा है।
IPO मार्केट में मायूसी
इन्वेस्टर अब केवल 'ग्रोथ' के वादे पर पैसा लगाने को तैयार नहीं हैं। इसका सीधा असर IPO मार्केट पर पड़ा है। Oura ने अपने $2.2 बिलियन के Nasdaq IPO को 29 सितंबर 2026 को टाल दिया, जबकि वह चार गुना ओवरसब्सक्राइब था। दूसरी तरफ, Anthropic अपनी लिस्टिंग के लिए सही समय का इंतजार कर रही है, और OpenAI फिलहाल प्राइवेट रहकर $30 बिलियन की फंडिंग जुटाने और $1.4 ट्रिलियन के वैल्यूएशन पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
फाइनेंशियल रिस्क और इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी लागत
यह शिफ्ट जोखिम भरा भी है। Anthropic के अनुसार, इंफ्रास्ट्रक्चर पर कुल कमिटमेंट $518 बिलियन तक पहुंच गया है। इतनी भारी लागत के कारण कई कंपनियां अभी भी बड़े नेट लॉस झेल रही हैं। अब बाजार की नजर इस पर है कि क्या यह भारी-भरकम इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च भविष्य में मुनाफे में बदलेगा, या फिर भारी मेंटेनेंस लागत कंपनियों के बैलेंस शीट पर बोझ बनी रहेगी।
