JetBack, Junova और Refare जैसे AI प्लेटफॉर्म्स फ्लाइट रिफंड को ऑटोमेट कर रहे हैं, लेकिन एयरलाइंस के बदल रहे नियम इनके बिजनेस मॉडल के लिए बड़ा रिस्क बन गए हैं।
ट्रैवल इंडस्ट्री में नई AI-आधारित स्टार्टअप्स की लहर आई है जो टिकट प्राइसिंग के पुराने तौर-तरीकों को बदल रही है। JetBack, Junova और Refare जैसे प्लेटफॉर्म्स बुकिंग के बाद भी एयरफेयर पर नजर रखते हैं। यदि टिकट की कीमत कम होती है, तो ये सर्विसेज ऑटोमेटिकली रिफंड या क्रेडिट रिक्वेस्ट डाल देती हैं। इसके बदले में ये कंपनियां रिफंड वैल्यू का 20% से 25% कमीशन लेती हैं या मंथली सब्सक्रिप्शन चार्ज करती हैं। यह मॉडल महामारी के बाद आए उस ट्रेंड पर टिका है, जिसमें एयरलाइंस ने नॉन-रिफंडेबल टिकटों पर भी चेंज फीस हटा दी थी।
एयरलाइंस के साथ सीधा टकराव
यह बिजनेस मॉडल एयरलाइंस की 'रेवेन्यू मैनेजमेंट स्ट्रैटेजी' से सीधे टकराता है। एयरलाइंस डिमांड के हिसाब से डायनामिक प्राइसिंग का इस्तेमाल करती हैं, ताकि मुनाफा अधिकतम हो। ये AI टूल्स एयरलाइंस की इसी एल्गोरिदम का फायदा उठाकर उन पैसों को वापस निकालने की कोशिश करते हैं, जो एयरलाइंस अपने पास रखना चाहती थीं।
बढ़ता हुआ 'पॉलिसी डिपेंडेंसी' का जोखिम
इन स्टार्टअप्स के लिए सबसे बड़ा खतरा यह है कि वे खुद कोई प्लेटफॉर्म ओनर नहीं हैं, बल्कि पूरी तरह से एयरलाइंस की लचीली नीतियों पर निर्भर हैं। उदाहरण के लिए, अक्टूबर में Alaska Airlines ने मैन्युअल फेयर-ड्रॉप एडजस्टमेंट पर रोक लगा दी, जिससे AI टूल्स के लिए काम करना मुश्किल हो गया है।
निवेशकों के लिए यहाँ बड़ा रिस्क 'पॉलिसी डिपेंडेंसी' है। अगर एयरलाइंस इन ऑटोमेटेड क्लेम को अपने मुनाफे के लिए खतरा मानती हैं, तो वे कभी भी अपनी सर्विस टर्म्स बदलकर इन टूल्स को ब्लॉक कर सकती हैं। हालांकि, एक राहत की बात यह है कि कई रिफंड कैश के बजाय 'फ्लाइट क्रेडिट' के रूप में मिलते हैं, जिससे पैसा एयरलाइन के ही इकोसिस्टम में रहता है। भविष्य में इन स्टार्टअप्स की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे एयरलाइंस और यात्रियों, दोनों के लिए कितनी वैल्यू बना पाते हैं।
