AI in Trading: क्या AI इंसानों की तरह कर सकता है ट्रेडिंग? नई रिसर्च से खुले बड़े राज

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AuthorAditya Rao|Published at:
AI in Trading: क्या AI इंसानों की तरह कर सकता है ट्रेडिंग? नई रिसर्च से खुले बड़े राज

नई रिसर्च में सामने आया है कि बड़े AI मॉडल्स कॉम्प्लेक्स मार्केट में इंसानी ट्रेडिंग की कुशलता (Efficiency) की बराबरी करने में विफल हो रहे हैं। यह ऑटोमेटेड ट्रेडिंग की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा करता है।

ट्रेडिंग की दुनिया में 'डबल ऑक्शन' (Double Auctions) एक ऐसी प्रक्रिया है जहाँ खरीदार और विक्रेता मिलकर एक उचित कीमत (Fair Price) तय करते हैं। हालिया रिसर्च बताती है कि बड़े आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल्स इस प्रक्रिया में इंसानों जैसी तेजी और कुशलता नहीं दिखा पा रहे हैं। जहाँ इंसानी ट्रेडर्स जल्दी कॉम्पिटिटिव कीमतों तक पहुँच जाते हैं, वहीं बड़े LLMs अक्सर लेनदेन पूरा करने के बजाय छोटे और मामूली मुनाफे के चक्कर में फंसे रहते हैं। इसके कारण मार्केट में ट्रेडिंग वॉल्यूम घट जाता है और बाजार की चाल धीमी हो जाती है।

चौंकाने वाला विरोधाभास (The Paradox)

रिसर्च में एक और दिलचस्प बात सामने आई है—छोटे AI मॉडल्स बड़े और महंगे मॉडल्स की तुलना में कहीं ज्यादा प्रभावी साबित हुए हैं। इसका मतलब यह है कि सिर्फ सबसे महंगी या कॉम्प्लेक्स टेक्नोलॉजी खरीदना बेहतर परफॉर्मेंस की गारंटी नहीं है।

कंपनियों के लिए चुनौती

McKinsey की 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, भारी निवेश के बावजूद केवल 37% कंपनियां ही AI के जरिए अपने अर्निंग्स (EBIT) में सकारात्मक बदलाव देख पा रही हैं। इसका सीधा मतलब है कि कंपनियां AI पर पैसा तो खर्च कर रही हैं, लेकिन उसका सही फाइनेंशियल रिटर्न नहीं मिल रहा है। गलत फैसले मार्केट में अस्थिरता (Market Instability) का कारण भी बन सकते हैं।

रेगुलेटर्स की पैनी नजर

Bank of England की Financial Stability Board ने AI के 'ब्लैक बॉक्स' डिसीजन-मेकिंग पर चिंता जताई है। वहीं भारत में भी, National Stock Exchange (NSE) और Bombay Stock Exchange (BSE) जोखिमों पर नजर रखने के लिए नए मैकेनिज्म तैयार कर रहे हैं। गौरतलब है कि NSE ने फाइनेंशियल ईयर 2026 में टेक्नोलॉजी पर ₹1,315 करोड़ का भारी-भरकम खर्च किया है।

अंत में, निवेशकों के लिए सीख यही है कि केवल टेक्नोलॉजी पर हो रहे खर्च को न देखें, बल्कि यह देखें कि कंपनियां इन ऑटोमेटेड सिस्टम्स के ऑपरेशनल रिस्क को कैसे मैनेज कर रही हैं। ह्यूमन ओवरसाइट (Human Oversight) अभी भी इस सेक्टर के लिए अनिवार्य बनी हुई है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.