ChatGPT, जो कभी AI की दुनिया का बेताज बादशाह था, अब कॉम्पिटिशन के आगे थोड़ा धीमा पड़ गया है। मई 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, इसका ग्लोबल मार्केट शेयर पहली बार **50%** से गिरकर **46.4%** पर आ गया है। वजह? Google का Gemini और Anthropic का Claude जैसे राइवल्स तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं।
क्या हुआ?
OpenAI का ChatGPT, जिसने जनरेटिव AI की दुनिया में धूम मचा रखी थी, अब कड़े मुकाबले का सामना कर रहा है। मई 2026 तक के आंकड़ों से पता चलता है कि इसका ग्लोबल मार्केट शेयर गिरकर 46.4% हो गया है, जो पहली बार 50% के आंकड़े से नीचे है। हालाँकि ChatGPT अभी भी 1.1 बिलियन से ज़्यादा मासिक यूजर्स के साथ सबसे पॉपुलर AI असिस्टेंट बना हुआ है, लेकिन इसके प्रतिद्वंद्वी तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। Google के Gemini के यूजर्स 662 मिलियन तक पहुँच गए हैं, और Anthropic के Claude के यूजर्स 245 मिलियन हो गए हैं। यह साफ दिखाता है कि यूजर्स अब AI टूल्स को लेकर ज़्यादा डाइवर्सिफाइड अप्रोच अपना रहे हैं।
इकोसिस्टम का कमाल
Google के Gemini की बढ़ती लोकप्रियता का एक बड़ा कारण कंपनी का विशाल प्रोडक्ट इकोसिस्टम है। AI को सीधे Google Search, Android और Workspace एप्लिकेशन्स में इंटीग्रेट करके, Google ने Gemini को अपने करोड़ों यूजर्स के लिए आसानी से उपलब्ध करा दिया है। इस स्ट्रैटेजी से यूजर्स को AI का इस्तेमाल करने के लिए अलग से कोई नया प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने की ज़रूरत नहीं पड़ती, जो एक बड़ा बिजनेस एडवांटेज है। वहीं, Anthropic के Claude ने प्रोफेशनल्स, रिसर्चर्स और डेवलपर्स के बीच अपनी खास जगह बनाई है, जो प्रोडक्टिविटी और कोडिंग क्षमताओं पर फोकस करके हाई रिटेंशन रेट हासिल कर रहा है।
AI में भारत की अहमियत
भारत जनरेटिव AI के लिए एक बड़े हब के रूप में उभरा है, जहाँ इन प्लेटफॉर्म्स के लिए वेब ट्रैफिक दुनिया में सबसे ज़्यादा है। एनालाइज किए गए पीरियड के दौरान, भारत में AI वेबसाइट्स पर 13 बिलियन से ज़्यादा विज़िट्स दर्ज की गईं, जो कि 8 बिलियन विज़िट्स वाले अमेरिका से काफी ज़्यादा है। यह भारतीय बाजार में AI टूल्स की भारी डिमांड को दर्शाता है। भारत के अंदर, मार्केट शेयर का ब्रेकडाउन ग्लोबल ट्रेंड जैसा ही है, जिसमें ChatGPT का शेयर 45.6%, Gemini का 31.6% और Claude का 10% है। Elon Musk के Grok और DeepSeek जैसे दूसरे प्लेयर्स 2.4% और 1.5% के छोटे, खास मार्केट शेयर रखते हैं।
ऐप डाउनलोड्स में नरमी
वेब ट्रैफिक तो ज़्यादा बना हुआ है, लेकिन नए AI ऐप डाउनलोड्स में एक खास नरमी देखी जा रही है। यह बताता है कि AI सेक्टर के मैच्योर होने के साथ ही, मास-मार्केट एडॉप्शन की तेज़ रफ्तार शायद धीमी पड़ रही है। यूजर्स धीरे-धीरे अपनी आदतें बना रहे हैं, और शुरुआत की एक्साइटमेंट के बाद अब यूटिलिटी और इंटीग्रेशन ग्रोथ के मुख्य ड्राइवर बनते जा रहे हैं। ऐप ग्रोथ में यह नरमी न सिर्फ भारत में, बल्कि कई बड़े ग्लोबल मार्केट्स में भी देखी जा रही है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
जैसे-जैसे AI सेक्टर हाई-ग्रोथ एक्सपेरिमेंटेशन से यूटिलिटी-बेस्ड कॉम्पिटिशन की ओर बढ़ रहा है, निवेशकों को कुछ अहम इंडिकेटर्स पर नज़र रखनी चाहिए। पहला, यूजर रिटेंशन; जैसे-जैसे टूल्स ज़्यादा कमोडिटाइज्ड होंगे, सिर्फ यूजर एक्विजिशन नंबरों से ज़्यादा यूजर्स को जोड़े रखने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी। दूसरा, इकोसिस्टम इंटीग्रेशन (जैसे Gemini) और स्पेशलाइज्ड टूल यूटिलिटी (जैसे Claude) के बीच की लड़ाई तय करेगी कि कौन से बिजनेस मॉडल लंबे समय तक मुनाफा कमा पाएंगे। आखिर में, यह देखना होगा कि क्या ऐप डाउनलोड्स में नरमी का मतलब ओवरऑल यूसेज में ठहराव है, या कंपनियाँ बेहतर फीचर्स और ब्रॉडर इंडस्ट्री एडॉप्शन के ज़रिए डेली एक्टिव एंगेजमेंट बढ़ाने के नए तरीके खोज पाती हैं।
