AI की दौड़ में दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियां बेतहाशा खर्च कर रही हैं। पिछले एक तिमाही में ही इन कंपनियों ने **$200 बिलियन** से ज्यादा का निवेश किया है और अनुमान है कि 2027 तक यह खर्च **$1.2 ट्रिलियन** तक पहुंच जाएगा, जिससे कंपनियों पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दौड़ अब एक ऐसी स्टेज पर आ गई है, जहां टेक दिग्गजों को भारी-भरकम कैपिटल खर्च (Capex) करना पड़ रहा है। Alphabet, Amazon, Meta और Microsoft जैसे बड़े खिलाड़ियों ने अकेले पिछली तिमाही में $200 बिलियन से ज्यादा की रकम डेटा सेंटर बनाने और एडवांस सेमीकंडक्टर चिप्स खरीदने में झोंक दी है।
कर्ज के सहारे AI का विस्तार
यह निवेश इतना बड़ा है कि कंपनियों का अपना कामकाज से होने वाला कैश जनरेशन इसके सामने छोटा पड़ रहा है। कई बड़ी कंपनियों का फ्री कैश फ्लो नेगेटिव में जा रहा है, यानी वे कमाई से ज्यादा खर्च कर रही हैं। इस गैप को भरने के लिए Microsoft जैसे दिग्गज बॉन्ड जारी कर रहे हैं, तो Amazon लोन फैसिलिटीज का सहारा ले रहा है। अब ग्रोथ के लिए कंपनियों की निर्भरता अपनी जेब से बढ़कर बाजार के कर्ज पर हो गई है, जिससे रिस्क प्रोफाइल काफी बदल गया है।
मुनाफे पर बड़ा सवाल
निवेशकों के बीच अब यह बहस छिड़ गई है कि 'कितनी तेजी से ग्रोथ होगी' के बजाय 'कितनी जल्दी मुनाफा आएगा'। हालांकि क्लाउड सेगमेंट से रेवेन्यू तो आ रहा है, लेकिन इन्फ्रास्ट्रक्चर पर होने वाला खर्च रेवेन्यू ग्रोथ के मुकाबले ज्यादा तेजी से भाग रहा है। इसे 'मोनेटाइजेशन गैप' कहा जा रहा है, जो भविष्य में प्रॉफिट मार्जिन पर तगड़ा दबाव डाल सकता है।
बाजार का मूड और जोखिम
इतने भारी खर्च को देखते हुए अब मार्केट का मूड बदलने लगा है। निवेशकों को डर है कि कहीं 'डिमांड क्लिफ' (Demand Cliff) की स्थिति न आ जाए, जहां AI की डिमांड इंफ्रास्ट्रक्चर के मुकाबले कम पड़ जाए। इसके अलावा, बिजली और कूलिंग सिस्टम जैसी फिजिकल लिमिटेशंस भी एक बड़ी बाधा बनी हुई हैं। अब निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आने वाली तिमाहियों में ये कंपनियां अपने खर्चों को मैनेज कर पाएंगी या कर्ज का स्तर और बढ़ेगा।
