xAI और OpenAI जैसी कंपनियां डेटा सेंटर के लिए ग्रिड का इंतजार करने के बजाय पुराने हवाई जहाज के 'जेट इंजन' का उपयोग कर रही हैं। यह 'स्पीड-टू-पावर' रणनीति इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए तो वरदान है, लेकिन इसमें पर्यावरण से जुड़े जोखिम और कानूनी चुनौतियां भी छिपी हैं।
बिजली की किल्लत और नया रास्ता
AI इंफ्रास्ट्रक्चर की दौड़ में सबसे बड़ी बाधा बिजली का ग्रिड बना हुआ है। नॉर्थ वर्जीनिया जैसे इलाकों में ग्रिड कनेक्शन मिलने में 7 साल तक का समय लग रहा है। इस देरी से बचने के लिए xAI और OpenAI जैसे दिग्गजों ने अनोखा तरीका निकाला है। वे पुराने विमानों के 'जेट इंजन' को पावर जनरेटर के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे डेटा सेंटर 24 महीने से भी कम समय में तैयार हो रहे हैं।
कैसे काम कर रही है यह तकनीक?
इसमें मुख्य रूप से Boeing 747 जैसे पुराने विमानों में इस्तेमाल होने वाले GE CF6-80C2 जैसे इंजनों का इस्तेमाल हो रहा है। ProEnergy जैसी कंपनियां इन इंजनों को रिफर्बिश करके गैस-फायर्ड टर्बाइन में बदल रही हैं। xAI ने मिसिसिपी में अपने Colossus 2 फैसिलिटी में इसका प्रयोग किया है, जबकि OpenAI के पार्टनर Crusoe ने टेक्सास के Stargate प्रोजेक्ट में इसे लागू किया है।
GE Vernova के लिए बड़ा मौका
बाजार के नजरिए से देखें तो यह टर्बाइन बनाने वाली कंपनियों के लिए एक बड़ा ग्रोथ ट्रिगर है। GE Vernova को इन एयरोडेरिवेटिव टर्बाइनों की जबरदस्त मांग मिली है। कंपनी के मुताबिक, 2026 की तीसरी तिमाही में ऑर्डर्स 57 यूनिट्स तक पहुंच गए हैं, जो पिछले साल इसी दौरान केवल 9 यूनिट्स थे। यह इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए एक स्पष्ट संकेत है।
निवेशक इन जोखिमों पर रखें नजर
यह रणनीति मुनाफे वाली लग सकती है, लेकिन इसके साथ कुछ बड़े खतरे भी हैं:
- पर्यावरण पर असर: ये कन्वर्टेड इंजन आधुनिक टर्बाइनों की तुलना में कम कुशल हैं और इनसे फॉर्मलडिहाइड व नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे हानिकारक उत्सर्जन अधिक होते हैं।
- कानूनी विवाद: xAI को मिसिसिपी में 'क्लीन एयर एक्ट' के तहत कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जहां स्थानीय निवासी इन पावर प्लांट्स को लेकर विरोध कर रहे हैं।
लंबे समय में, यदि ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर सुधरता है या पर्यावरण नियम कड़े होते हैं, तो ये इंजन 'स्टैंडर्ड एसेट' (फंसे हुए निवेश) में बदल सकते हैं। निवेशकों को आने वाले रेगुलेटरी फैसलों और मिसिसिपी के अदालती मामलों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।
