एआई (AI) की मदद से साइबर हमलों की लागत घटकर **$3** से भी कम रह गई है, जिससे भारत में साइबर घटनाओं में **44%** का बड़ा उछाल आया है। फाइनेंशियल ईयर **2025** में बैंकिंग फ्रॉड का आंकड़ा **₹360 अरब** को पार कर गया है, जिससे बैंकों और आईटी कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने डिजिटल अपराध की पूरी अर्थव्यवस्था को बदल दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब एक साइबर हमले को अंजाम देने की लागत घटकर महज $2.77 के करीब आ गई है। एआई मॉडल के जरिए सॉफ्टवेयर की खामियों को पारंपरिक तरीकों की तुलना में 90 गुना तेजी से पहचाना जा रहा है, जिससे फ्रॉड करना बेहद आसान हो गया है।
भारतीय वित्तीय प्रणाली पर मार
CERT-In के आंकड़ों के अनुसार, भारत में साल 2025 के दौरान 29 लाख साइबर घटनाएं दर्ज की गईं, जो पिछले साल के मुकाबले 44% अधिक हैं। इसका सीधा असर अर्थव्यवस्था पर दिख रहा है। वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले साइबर फ्रॉड के मामले ₹190 अरब से ज्यादा के हैं, जो देश के फाइनेंशियल सिस्टम के लिए एक बड़ी चुनौती बन गए हैं।
निवेशकों के लिए जोखिम और अवसर
निवेशकों के लिए यह स्थिति दोहरी है। एक तरफ, भारतीय बैंकों को अपने ग्राहकों की सुरक्षा के लिए साइबर सुरक्षा और फ्रॉड डिटेक्शन पर भारी निवेश करना पड़ रहा है। यह बढ़ता खर्च कंपनियों के ऑपरेशनल एक्सपेंस को बढ़ा रहा है, जो भविष्य में नेट प्रॉफिट मार्जिन पर असर डाल सकता है।
दूसरी तरफ, TCS, Infosys, और Wipro जैसी आईटी दिग्गज कंपनियों के लिए यह एक नई डिमांड बनकर उभरा है। चूंकि कंपनियां अपनी डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने में लगी हैं, इसलिए इन आईटी फर्मों के लिए एआई-बेस्ड सिक्योरिटी सॉल्यूशन की मांग बढ़ रही है। हालांकि, हमलों की रफ्तार इतनी तेज है कि सुरक्षा पैच तैयार करने का समय 14 दिन से घटकर अब सिर्फ 3 दिन रह गया है।
भविष्य की रणनीति
अब डीपफेक, वॉयस क्लोनिंग और सिंथेटिक आइडेंटिटी जैसे नए खतरों ने पारंपरिक सुरक्षा प्रणालियों को फेल कर दिया है। निवेशकों के लिए सलाह है कि वे कंपनियों के क्वार्टरली रिजल्ट्स में 'साइबर सिक्योरिटी खर्च' और 'फ्रॉड प्रोविजन' पर नजर रखें। आने वाले समय में वही बैंक और आईटी कंपनियां सफल होंगी जो रीयल-टाइम सिक्योरिटी मॉडल को अपनाकर मार्जिन को सुरक्षित रखने में कामयाब रहेंगी।
