सेमीकंडक्टर सेक्टर में इस वक्त अजीब हालात हैं। TSMC और SK Hynix जैसी दिग्गज कंपनियों के पास 2030 तक के ऑर्डर फुल हैं, लेकिन शेयर बाजार में बिकवाली जारी है। निवेश के भारी खर्च और भविष्य में प्रॉफिट को लेकर निवेशकों की चिंताएं अब भारी पड़ रही हैं।
सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री इस वक्त एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहां $1 ट्रिलियन से ज्यादा की मार्केट वैल्यू साफ हो चुकी है। बाजार का मिजाज ऐसा है कि एक तरफ कंपनियों का काम धड़ाधड़ चल रहा है, तो दूसरी तरफ फाइनेंशियल मार्केट में गिरावट का डर छाया हुआ है।
डिमांड वर्सेज सेंटीमेंट का खेल
SK Hynix और TSMC जैसे दिग्गज बार-बार कह रहे हैं कि AI हार्डवेयर की मांग रिकॉर्ड लेवल पर है। SK Hynix के पास 2028 तक 50% से ज्यादा कैपेसिटी के कॉन्ट्रैक्ट्स लॉक हो चुके हैं। डिमांड इतनी ज्यादा है कि TSMC अपनी एडवांस्ड पैकेजिंग सर्विसेज के दाम 20% तक बढ़ाने पर विचार कर रहा है।
लेकिन इसके उलट, Intel के कमजोर गाइडेंस के बाद निवेशकों का भरोसा डगमगा गया है। बाजार अब 'Show Me The Money' वाले मोड में है—यानी अब सिर्फ ऑर्डर बुक नहीं, बल्कि इस बात पर ध्यान है कि क्या इन डेटा सेंटर्स से वाकई मोटा मुनाफा आएगा या नहीं।
क्यों डर रहे हैं निवेशक?
बड़ी समस्या 'Financing' की है। AI इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने के लिए अरबों डॉलर का खर्च आ रहा है। अगर टेक कंपनियां इन डेटा सेंटर्स से स्पष्ट मुनाफा नहीं दिखा पाईं, तो वे भविष्य में अपने ऑर्डर्स घटा सकती हैं। इसके अलावा, स्किल्ड लेबर की कमी और इक्विपमेंट मिलने में देरी जैसी ऑपरेशनल दिक्कतें भी मुनाफा कम कर सकती हैं।
अब सबकी नजरें 17 नवंबर पर टिकी हैं, जब NVIDIA के तीसरी तिमाही के नतीजे आएंगे। बाजार यह देखेगा कि क्या कंपनियां अपनी स्पेंडिंग जारी रखेंगी या बजट में कटौती शुरू करेंगी।
