AI के दौर में भारत के टेक सेंटर्स में बदलाव
भारत में काम कर रहे ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) अपनी हायरिंग पॉलिसी बदल रहे हैं। अब वे सिर्फ कोडिंग स्किल्स से ज्यादा डोमेन एक्सपर्टाइज और प्रोडक्ट की गहरी समझ रखने वाले कर्मचारियों को तरजीह दे रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से आसान प्रोग्रामिंग वाले काम अब ऑटोमेटिक हो गए हैं। ऐसे में कंपनियां ऐसे कर्मचारियों की तलाश में हैं जो टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके मुश्किल बिजनेस प्रॉब्लम्स को सॉल्व कर सकें। अब ज्यादा फोकस हाई-वैल्यू इंजीनियरिंग, डेटा और प्रोडक्ट डेवलपमेंट रोल्स पर है।
नई स्किल्स की जरूरत
कोडिंग स्किल्स अभी भी जरूरी हैं, लेकिन सिर्फ यही काफी नहीं हैं। कर्मचारियों को सप्लाई चेन या रिटेल जैसे क्षेत्रों का गहरा ज्ञान और AI की समझ भी होनी चाहिए। कुछ कोडिंग का काम आउटसाइड वेंडर्स को दिया जा रहा है, जिससे ऐसे प्रोडक्ट इंजीनियर्स की वैल्यू बढ़ गई है जो इन पार्टनर्स के साथ मिलकर काम कर सकें। इस बदलाव से GCCs सपोर्ट सेंटर्स की जगह एडवांस इंजीनियरिंग और डेटा वर्क के हब बनते जा रहे हैं।
एंट्री-लेवल जॉब्स और ट्रेनिंग का भविष्य
कंपनियां फिलहाल कम से कम चार साल का अनुभव रखने वाले कर्मचारियों को हायर कर रही हैं। अनुभवी प्रोफेशनल्स को प्राथमिकता देने का यह ट्रेंड AI द्वारा बेसिक कोडिंग टास्क को संभालने की वजह से एंट्री-लेवल जॉब्स को कम कर सकता है। इस समस्या से निपटने के लिए, Kimberly-Clark जैसी कंपनियां अपने मौजूदा कर्मचारियों को AI में ट्रेनिंग दे रही हैं ताकि उनके स्किल्स अपडेट रहें। हायरिंग अब सिर्फ पुराने जॉब डिस्क्रिप्शन में फिट होने के बजाय जरूरी क्षमताओं और सीखने की क्षमता पर ज्यादा केंद्रित है।
इंडस्ट्री और यूनिवर्सिटीज के बीच तालमेल
भारत हर साल लगभग 15 लाख इंजीनियर्स ग्रेजुएट करता है। इन ग्रेजुएट्स को नए जॉब मार्केट के लिए तैयार करने के लिए कंपनियों और विश्वविद्यालयों के बीच मजबूत रिश्ते बनाना बहुत जरूरी है। लक्ष्य यह है कि ग्रेजुएट्स को प्रैक्टिकल डोमेन नॉलेज मिले, क्योंकि GCCs की बदलती जरूरतों के लिए सिर्फ टेक्निकल इंजीनियरिंग बैकग्राउंड अब काफी नहीं है।
ग्लोबल और इंडस्ट्री ट्रेंड्स
भारत के टेक सेक्टर में यह बदलाव AI को अपनाने से दुनिया भर में हो रहे बदलावों को दर्शाता है। दूसरे देश भी अपनी वर्कफोर्स को ट्रेन करने और कॉम्प्लेक्स कॉग्निटिव टास्क पर फोकस करने की जरूरत देख रहे हैं। जो कंपनियां इन बदलावों के मुताबिक ढलने में नाकाम रहेंगी, उन्हें भविष्य में AI के आम होने पर सफल होने वाले कर्मचारी ढूंढने और बनाए रखने में मुश्किल हो सकती है। मजबूत ट्रेनिंग प्रोग्राम और एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस के साथ अच्छे रिश्ते रखने वाले बिजनेस सबसे अच्छा प्रदर्शन करेंगे, जो टेक्निकल स्किल्स को गहरी बिजनेस समझ के साथ जोड़ेंगे।
