बिजनेस लीडर्स का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्रोडक्टिविटी तो बढ़ा सकता है, लेकिन यह निवेश की सफलता की गारंटी नहीं देता। निवेशकों को सावधान रहने की ज़रूरत है, क्योंकि इतिहास गवाह है कि सिर्फ नई टेक्नोलॉजी के दम पर खराब बिजनेस एग्जीक्यूशन (Business Execution) को पार नहीं किया जा सकता।
AI से प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी, पर मुनाफे का क्या?
Fortune India के एक इवेंट में इंडस्ट्री लीडर्स ने इस बात पर ज़ोर दिया कि AI को वर्कफोर्स (Workforce) के लिए एक सहायक के तौर पर देखा जा रहा है, न कि रिप्लेसमेंट (Replacement) के तौर पर। AI का सफल इंटीग्रेशन (Integration) लीडरशिप (Leadership) की समझ और प्रयोग करने की संस्कृति पर निर्भर करता है। Salesforce India जैसी कंपनियां पहले ही ऑपरेटिंग फायदे देख रही हैं; जो काम पहले घंटों में होते थे, वे अब AI की मदद से करीब 30 मिनट में पूरे हो रहे हैं।
प्रोडक्टिविटी ≠ प्रॉफिटेबिलिटी
बिजनेस लीडर देविका मेहरा, जो First Global की फाउंडर और चेयरपर्सन हैं, ने आगाह किया कि निवेशकों को यह नहीं मान लेना चाहिए कि नई टेक्नोलॉजी अपनाने से सफलता पक्की है। इतिहास ऐसी कंपनियों से भरा पड़ा है जिन्होंने नई टेक्नोलॉजी तो अपनाई, लेकिन खराब मैनेजमेंट (Management) या एग्जीक्यूशन (Execution) की वजह से फेल हो गईं। निवेशकों को उन कंपनियों में फर्क करना चाहिए जो वाकई AI से अपना बिजनेस एडवांटेज (Business Advantage) बढ़ा रही हैं और वे जो सिर्फ ट्रेंड (Trend) फॉलो कर रही हैं, बिना प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) या रेवेन्यू ग्रोथ (Revenue Growth) के किसी स्पष्ट प्लान के।
अल्गोरिथम पर निर्भरता के रिस्क
ऑटोमेटेड सिस्टम (Automated System) पर ज़्यादा निर्भरता के भी अपने रिस्क हैं। ह्यूमन ओवरसाइट (Human Oversight) के बिना, AI के फैसले गलत हो सकते हैं, जैसे डेटा में छिपी हुई विसंगतियां या बायस (Bias) का बढ़ जाना। मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing) से लेकर फाइनेंशियल सर्विसेज (Financial Services) तक, हर सेक्टर की कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि AI डिप्लॉयमेंट (Deployment) में मजबूत गवर्नेंस (Governance) हो और डेटा में भारत के टियर-II और टियर-III शहरों जैसे विविध मार्केट्स का प्रतिनिधित्व हो। खराब तरीके से लागू किए गए सिस्टम्स ऑपरेशनल रिस्क (Operational Risk) पैदा कर सकते हैं, जो कंपनी की इमेज या कस्टमर ट्रस्ट (Customer Trust) को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
जो निवेशक AI इनिशिएटिव्स (Initiatives) के आधार पर कंपनियों का मूल्यांकन कर रहे हैं, उन्हें मैनेजमेंट के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन (Digital Transformation) के दावों से आगे देखना चाहिए। असली पैरामीटर यह देखना है कि क्या प्रोडक्टिविटी में यह बढ़ोतरी असल में प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margins), रिटर्न रेशियो (Return Ratios) या मार्केट शेयर (Market Share) में सुधार ला रही है। कंपनी की AI को सफलतापूर्वक इंटीग्रेट (Integrate) करने की क्षमता, साथ ही महत्वपूर्ण फैसलों में मानवीय निर्णय को बनाए रखना, लॉन्ग-टर्म वैल्यू (Long-term Value) तय करने में अहम साबित होगा। यह देखना ज़रूरी होगा कि कंपनियां AI में कितना कैपिटल (Capital) लगा रही हैं और क्या ये निवेश आने वाली तिमाही रिपोर्ट्स में स्पष्ट फाइनेंशियल परफॉर्मेंस (Financial Performance) में तब्दील होते हैं।
