Payment Gateway: 78% भारतीय मर्चेंट्स AI के लिए बदल सकते हैं अपना प्लेटफॉर्म

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AuthorAditya Rao|Published at:
Payment Gateway: 78% भारतीय मर्चेंट्स AI के लिए बदल सकते हैं अपना प्लेटफॉर्म

भारत के करीब 80% व्यापारी अब अपने मौजूदा पेमेंट गेटवे को बदलने की तैयारी में हैं। इसकी वजह कम फीस नहीं, बल्कि बेहतर AI-संचालित फ्रॉड डिटेक्शन और ऑटोमेशन की मांग है।

अब ट्रांजैक्शन फीस नहीं, टेक्नोलॉजी है प्राथमिकता

भारतीय व्यापारियों की अपने पेमेंट गेटवे प्रोवाइडर्स के प्रति पुरानी वफादारी अब टूट रही है। 'इंडियन मर्चेंट पेमेंट सर्वे 2026' के मुताबिक, 78% कंपनियां अब अपने पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को माइग्रेट करने के लिए तैयार हैं, अगर उन्हें बेहतर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स मिलें। पहले जहां व्यापारी केवल ट्रांजैक्शन फीस (MDR) को प्राथमिकता देते थे, अब उनका ध्यान ऑपरेशनल एफिशिएंसी और एडवांस टेक्नोलॉजी पर केंद्रित हो गया है।

मैनुअल काम से मुक्ति की होड़

कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती मैनुअल फाइनेंशियल वर्कफ्लो है। लगभग 60% बिजनेस रोज कई घंटे केवल 'मैनुअल रिकंसिलिएशन' (पेमेंट रिकॉर्ड्स को अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर से मिलाना) में बिताते हैं। व्यापारी अब ऐसे गेटवे की तलाश में हैं जो ऑटोमेटेड रिकंसिलिएशन और सीधे अकाउंटिंग सिस्टम के साथ इंटीग्रेशन की सुविधा दें।

फ्रॉड से जंग और सुरक्षा की नई चुनौती

यूपीआई (UPI) आधारित फ्रॉड, चार्जबैक स्कैम्स और डिलीवरी फ्रॉड ने व्यापारियों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बड़ी कंपनियां अब ऐसे AI-पावर्ड सिस्टम चाहती हैं जो फ्रॉड को पहले ही पहचान सकें। हालांकि, मौजूदा प्रोवाइडर्स को छोड़ने में एक तकनीकी बाधा भी है—एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ERP) कनेक्शन को माइग्रेट करना काफी जटिल है, जो कई कंपनियों को रुकने पर मजबूर करता है।

'एजेंटिक पेमेंट्स' का दौर

मुंबई में आयोजित 9वें ग्लोबल फिनटेक फेस्टिवल में 'एजेंटिक पेमेंट्स' (Agentic Payments) पर खास जोर दिया गया। ये AI-संचालित ऑटोनॉमस एजेंट्स होंगे जो बिना इंसानी दखल के नियम-आधारित ट्रांजैक्शन पूरा कर सकेंगे। फिनटेक कंपनियों के लिए अब चुनौती यह है कि जो प्रोवाइडर्स इन इंटेलिजेंट फीचर्स को नहीं अपनाएंगे, उनके ग्राहक छोड़ कर जा सकते हैं।

निवेशकों के लिए यह एक बड़ा बदलाव है। कंपनियां जो अपनी AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च कर रही हैं, वे मार्केट शेयर हासिल कर सकती हैं। हालांकि, इन ऑटोनॉमस ट्रांजैक्शन में जवाबदेही और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क अभी भी एक बड़ा सवाल बना हुआ है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.