महंगे कंपोनेंट और मेमोरी कॉस्ट की वजह से 5G की रफ्तार धीमी पड़ गई है। नतीजतन, 2026 में 4G स्मार्टफोन की शिपमेंट में **3%** की ग्रोथ का अनुमान है क्योंकि कंपनियां अब बजट-फ्रेंडली मॉडल पर फोकस कर रही हैं।
भारत में 5G की ओर बढ़ते कदम अब एक बड़े अवरोध का सामना कर रहे हैं। कंपोनेंट और मेमोरी की बढ़ती कीमतों ने स्मार्टफोन कंपनियों को अपनी स्ट्रेटजी बदलने पर मजबूर कर दिया है। बाजार में अब पूरी तरह 5G की ओर शिफ्ट होने के बजाय, 4G स्मार्टफोन की एक अप्रत्याशित वापसी देखने को मिल रही है। डेटा के मुताबिक, 2026 में 4G स्मार्टफोन की शिपमेंट में 3% की बढ़त की उम्मीद है, जो पिछले साल की गिरावट के बाद एक बड़ा बदलाव है। कुल शिपमेंट में 4G डिवाइस की हिस्सेदारी 2025 के 11% से बढ़कर 2026 में 13% होने का अनुमान है, और 2027 तक यह 15% तक जा सकती है।
कंपनियों की बदली रणनीति
स्मार्टफोन कंपनियां ₹15,000 से कम की कीमत वाले सेगमेंट में 5G अनुभव देना मुश्किल महसूस कर रही हैं। डिवाइस को किफायती बनाए रखने के लिए ब्रांड्स 5G चिप के बजाय बेहतर डिस्प्ले, बैटरी लाइफ और स्टोरेज जैसे हार्डवेयर फीचर्स को तरजीह दे रहे हैं। ₹10,000 से ₹20,000 के प्राइस ब्रैकेट में, 4G-ओनली मॉडल पेश करने वाली कंपनियों की संख्या 2025 में सिर्फ 2 थी, जो 2026 में बढ़कर 12 हो गई है। Lava International, Xiaomi, Infinix और Realme जैसे दिग्गज अपने रोडमैप में बदलाव कर रहे हैं।
वित्तीय जोखिम और चुनौतियां
यह रणनीति ग्राहकों की मांग तो पूरी कर रही है, लेकिन कंपनियों के लिए बिजनेस रिस्क भी बढ़ा रही है। कंपोनेंट की महंगाई से प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव है। Lava International जैसे खिलाड़ियों के लिए यह सेक्टर और भी चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि उन्हें पहले भी अनुपालन (compliance) संबंधी और नेगेटिव कैश फ्लो जैसी वित्तीय दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। विदेशी मुद्रा उतार-चढ़ाव और पूंजी की तंगी कंपनी की विस्तार योजनाओं को प्रभावित कर सकती है।
निवेशकों के लिए अहम संकेत
4G की यह वापसी ग्लोबल कंपोनेंट प्राइसिंग और ग्राहकों की पसंद पर निर्भर करेगी। यदि 5G का इस्तेमाल धीमा रहता है, तो टेलीकॉम कंपनियों के रेवेन्यू पर भी असर पड़ सकता है। निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनियां बढ़ती लागत के बीच अपना मार्जिन कैसे बचाती हैं और क्या यह 4G की मांग स्थायी है या केवल अस्थायी विकल्प।
