भारत में कंपनियां अब अपने कर्मचारियों के प्रबंधन के लिए सहज ज्ञान (intuition) पर आधारित फैसलों से आगे बढ़कर डेटा-संचालित (data-driven) तरीकों को अपना रही हैं। Deloitte की एक रिपोर्ट के अनुसार, अब **43%** भारतीय कंपनियां ह्यूमन रिसोर्स (HR) के लिए एडवांस डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल कर रही हैं।
Detailed Coverage
HR में AI का बढ़ता दखल
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भारतीय कंपनियों के काम करने के तरीके को तेजी से बदल रहा है, खासकर ह्यूमन रिसोर्स (HR) के क्षेत्र में। Deloitte इंडिया की लेटेस्ट रिपोर्ट बताती है कि 43% भारतीय संगठन अब पीपुल एनालिटिक्स (कर्मचारी डेटा विश्लेषण) में काफी आगे निकल चुके हैं। यह बदलाव बताता है कि कंपनियां अपने वर्कफोर्स की प्रोडक्टिविटी और स्किल डेवलपमेंट को बेहतर बनाने के लिए डेटा का खूब इस्तेमाल कर रही हैं।
AI का HR प्रक्रियाओं में एकीकरण
बेसिक एनालिटिक्स से आगे बढ़कर, 50% से ज़्यादा भारतीय कंपनियां AI को सीधे अपने मुख्य HR कामों में जोड़ रही हैं। इससे न केवल रोजमर्रा के एडमिनिस्ट्रेटिव काम ऑटोमेट हो रहे हैं, बल्कि संगठनों के अंदर जॉब रोल्स भी बदल रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 60% से ज़्यादा कंपनियां अब ऐसे रोल्स को प्राथमिकता दे रही हैं जिनमें कॉम्प्लेक्स प्रॉब्लम-सॉल्विंग और क्रिएटिविटी की जरूरत हो। निवेशकों के लिए, यह टेक्नोलॉजी-आधारित HR की ओर झुकाव बताता है कि कंपनियां ऑपरेशनल एफिशिएंसी को कम करने और बेहतर टैलेंट यूटिलाइजेशन से लॉन्ग-टर्म प्रोडक्टिविटी बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं।
भविष्य के स्किल्स और वर्कफोर्स प्लानिंग पर फोकस
बदलती बिजनेस जरूरतों के लिए खुद को तैयार करते हुए, कंपनियों ने वर्कफोर्स की तैयारी (workforce readiness) पर खासा ध्यान देना शुरू कर दिया है। लगभग 80% संगठन अपनी वर्कफोर्स प्लानिंग और टैलेंट स्ट्रेटजी को बेहतर बना रहे हैं, जबकि 76% भविष्य की स्किल गैप्स (कौशल की कमी) को पहचानने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। री-स्किलिंग और इंटरनल मोबिलिटी पर यह एक्टिव अप्रोच कंपनियों को एक मजबूत वर्कफोर्स बनाने में मदद करेगा। इसके अलावा, 81% कंपनियां कॉम्पिटिटिव माहौल में टैलेंट को बनाए रखने के लिए कर्मचारी एंगेजमेंट और करियर डेवलपमेंट पर खर्च बढ़ा रही हैं।
डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और कार्यान्वयन में जोखिम
आधुनिकीकरण की इस दौड़ के बावजूद, एग्जीक्यूशन (कार्यान्वयन) में कुछ कमियां साफ दिख रही हैं। 70% से ज़्यादा कंपनियां अभी भी स्टैटिक रिपोर्टिंग पर निर्भर हैं, जो उन्हें तेजी से फैसले लेने के लिए प्रेडिक्टिव डेटा का इस्तेमाल करने से रोकती है। मजबूत डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और गवर्नेंस की कमी कई संगठनों के लिए एक बड़ी बाधा बनी हुई है, जिससे AI अपनाने के असली फायदे मिलने में देरी हो सकती है। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि कंपनियां शुरुआती निवेश और वर्कफोर्स एफिशिएंसी में मापने योग्य लाभ के बीच के अंतर को कितनी सफलतापूर्वक पाट पाती हैं।
अलग-अलग सेक्टर्स में अपनाने की ट्रेंड
एनालिटिक्स को अपनाने की रफ्तार सभी सेक्टर्स में एक जैसी नहीं है। टेक्नोलॉजी और IT-इनेबल्ड सर्विसेज (ITeS) अपने इन-बिल्ट डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण इस मामले में सबसे आगे हैं। दूसरी ओर, मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल और इंडस्ट्रियल सेक्टर्स अभी भी इस बदलाव के शुरुआती दौर में हैं। ये सेक्टर्स प्रोडक्टिविटी ग्रोथ के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर पेश करते हैं, लेकिन इनकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे अपने पुराने सिस्टम को कितनी प्रभावी ढंग से अपडेट करते हैं और अपने बड़े वर्कफोर्स को नई स्किल्स सिखाते हैं।
