अमेरिका के लगभग **1,800** वाटर सिस्टम्स का डेटा चोरी होने की खबर है, जो गंभीर साइबर खतरे की ओर इशारा करती है। यह घटना ग्लोबल लेवल पर क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा और IT सर्विस कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा कर रही है।
हालिया रिसर्च में अमेरिका के करीब 1,800 वाटर और वेस्टवॉटर संगठनों में एक बड़ी साइबर खामी का पता चला है। यह सेंध 'इन्फोस्टीलर मालवेयर' (Infostealer Malware) के जरिए लगाई गई है, जो बिना किसी भनक के कर्मचारियों के लॉगिन क्रेडेंशियल्स और एक्टिव सेशन टोकन चुरा लेता है।
सुरक्षा कवच को कैसे तोड़ा?
सामान्य पासवर्ड चोरी से अलग, सेशन टोकन के जरिए हमलावर Multi-Factor Authentication (MFA) को भी बायपास कर देते हैं। इससे हमलावर एक ऑथराइज्ड यूजर की तरह नेटवर्क में घुसकर वाटर पंप और कंट्रोल वाल्व जैसे संवेदनशील सिस्टम को कंट्रोल करने में सक्षम हो जाते हैं।
सप्लाई चेन में बड़ी खामी
रिपोर्ट के अनुसार, एक थर्ड-पार्टी मीटरिंग टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर पर हुए हमले से 167 अलग-अलग यूटिलिटी कंपनियों का डेटा एक्सपोज हुआ है। यह साबित करता है कि हमलावर अक्सर छोटी और कम सुरक्षित कंपनियों को जरिया बनाकर बड़ी संस्थाओं के नेटवर्क में सेंध लगा रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
दुनिया भर में क्रिटिकल सेक्टर पर बढ़ते खतरों के कारण अब साइबर सिक्योरिटी बजट में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। इंडियन IT कंपनियां, जो दुनिया भर में साइबर सिक्योरिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट की सेवाएं देती हैं, इस ट्रेंड से सीधे तौर पर प्रभावित होंगी। भविष्य में साइबर सिक्योरिटी सॉल्यूशन के लिए बढ़ती ग्लोबल डिमांड, भारतीय IT सेक्टर के रेवेन्यू ग्रोथ को नई रफ्तार दे सकती है।
