कनाडा की 12 साल की डेवलपर, Mana Jampala, ने एक AI वॉइस असिस्टेंट 'Voxa' तैयार किया है। यह टूल छोटे बिजनेसेज को 24/7 कस्टमर कॉल्स संभालने में मदद करेगा, जिससे अपॉइंटमेंट्स और ऑर्डर प्रोसेसिंग ऑटोमैटिक हो जाएगी।
Voxa: छोटे बिजनेसेज के लिए 24/7 कॉल असिस्टेंट
12 साल की Mana Jampala ने एक जबरदस्त AI प्लेटफॉर्म 'Voxa' लॉन्च किया है। यह प्लेटफॉर्म खास तौर पर छोटे बिजनेसेज के लिए बनाया गया है ताकि वे अपने ग्राहकों से लगातार जुड़े रह सकें। यह AI टूल एक वर्चुअल असिस्टेंट की तरह काम करता है, जो चौबीसों घंटे आने वाली कॉल्स को रिसीव करता है, अपॉइंटमेंट्स शेड्यूल करता है और ऑर्डर लेता है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बिजनेस कॉल मिस न हो और रेवेन्यू का नुकसान न हो।
Voxa Agents और सेल्फ-डेवलप्ड सिस्टम
'Voxa' को नवंबर 2025 में लॉन्च किया गया था और इसमें 'Voxa Agents' नाम का एक खास फीचर भी है। इसकी मदद से बिजनेस के मालिक बिना किसी टेक्निकल कोडिंग के, सिर्फ प्लेन लैंग्वेज में इंस्ट्रक्शन्स देकर अपने AI रिप्रेजेंटेटिव्स को कस्टमाइज़ कर सकते हैं। Mana Jampala ने थर्ड-पार्टी इंफ्रास्ट्रक्चर से हटकर अपना खुद का सिस्टम डेवलप किया है, ताकि छोटे बिजनेसेज को एक भरोसेमंद सर्विस मिल सके, जिनके पास डेडिकेटेड कॉल सेंटर्स के लिए रिसोर्सेज नहीं होते।
शुरुआती दौर और फंडिंग
टेस्टिंग फेज में Voxa ने सैकड़ों कॉल्स को सफलतापूर्वक हैंडल किया है। फिलहाल, यह स्टार्टअप अपने पहले पेड कस्टमर को जोड़ने की कोशिश कर रहा है। अभी यह बिजनेस बूटस्ट्रैप्ड (बिना बाहरी फंडिंग के) चल रहा है। Mana Jampala की भविष्य की योजनाओं में किसी एक्सेलेरेटर प्रोग्राम से जुड़ना और वेंचर कैपिटल (VC) सपोर्ट लेना शामिल है।
Mana Jampala की टेक जर्नी
Mana Jampala की टेक्नोलॉजी में दिलचस्पी 9 साल की उम्र में शुरू हुई, जब उन्होंने पाइथन प्रोग्रामिंग लैंग्वेज सीखी। उन्होंने कोडिंग कैंप्स में हिस्सा लिया है और यूनिवर्सिटी-लेवल साइंस कॉम्पिटिशन्स में भी पहचान हासिल की है। उन्हें 1517 Medici Project से ग्रांट भी मिली है, जो युवा उद्यमियों को फाइनेंशियल मदद देता है।
कम उम्र में बिजनेस चलाने की अपनी चुनौतियों पर Mana का कहना है कि प्रोफेशनल मीटिंग्स में लोग अक्सर उनकी उम्र और पेरेंटल ओवरसाइट पर ध्यान देते हैं, जबकि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रोडक्ट की परफॉर्मेंस पर फोकस रहता है। इस मुश्किल से निपटने के लिए, उन्होंने वार्म इंट्रोडक्शन्स और रेफरल्स पर निर्भर रहना शुरू कर दिया है। वह Discord जैसे प्लेटफॉर्म पर दूसरे युवा टेक फाउंडर्स के साथ भी अपने अनुभव शेयर करती हैं।
आगे की राह: ग्रोथ के लिए क्या हैं माइलस्टोन्स?
इस तरह के स्टार्टअप्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती एक फंक्शनल प्रोडक्ट को एक सस्टेनेबल रेवेन्यू स्ट्रीम में बदलना है। आगे चलकर, पहले पेड कस्टमर को हासिल करना, टेस्ट वॉल्यूम से आगे सिस्टम की स्टेबिलिटी को बनाए रखना और मौजूदा AI कस्टमर सर्विस टूल्स के मुकाबले अपनी स्ट्रेटेजी को प्रभावी बनाना अहम माइलस्टोन्स होंगे। जैसे-जैसे यह वेंचर बढ़ेगा, यूजर बेस को स्केल करते हुए ऑपरेशनल कॉस्ट्स को कंट्रोल करना बहुत जरूरी होगा।
