Zomato का बड़ा फैसला! रेस्टोरेंट पर 'प्राइस पैरिटी' का शिकंजा हटाया, निवेशकों को क्या मिलेगा?

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AuthorAditya Rao|Published at:
Zomato का बड़ा फैसला! रेस्टोरेंट पर 'प्राइस पैरिटी' का शिकंजा हटाया, निवेशकों को क्या मिलेगा?
Overview

Zomato ने आखिरकार अपने रेस्टोरेंट पार्टनर्स के लिए एक विवादास्पद 'प्राइस पैरिटी' (Price Parity) क्लॉज को हटा दिया है। इस नियम के तहत, अगर कोई रेस्टोरेंट Zomato प्लेटफॉर्म से कम कीमत पर डाइन-इन या डायरेक्ट ऑर्डर के लिए खाना देता था, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता था। यह कदम लगातार बढ़ते कॉम्पिटिशन और भारत की एंटीट्रस्ट बॉडी (Competition Commission of India - CCI) के दबाव के बीच उठाया गया है।

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रेस्टोरेंट्स को मिली बड़ी राहत, 'प्राइस पैरिटी' क्लॉज खत्म

Zomato ने अब आधिकारिक तौर पर 'प्राइस पैरिटी' (Price Disparity) रूल को खत्म कर दिया है। इस नियम के हटने से रेस्टोरेंट मालिकों को बड़ी राहत मिली है, जो लंबे समय से इसका विरोध कर रहे थे। इस नियम के अनुसार, Zomato किसी भी रेस्टोरेंट पर प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड कीमतों से कम कीमत पर डाइन-इन (Dine-in) या डायरेक्ट ऑर्डर देने पर 3 गुना तक का जुर्माना लगा सकता था। नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने इस फैसले का स्वागत किया है। NRAI के प्रेसिडेंट सागर जे. दरियानी ने कहा, "यह हमारा प्रोडक्ट है और दाम भी हमारे होने चाहिए। हमें खुशी है कि अब प्राइस पैरिटी लागू नहीं की जाएगी।"

एंटीट्रस्ट जांच का असर और बढ़ती कॉम्पिटिशन

यह बड़ा फैसला भारत की एंटीट्रस्ट अथॉरिटी, कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) के बढ़ते दबाव के बीच आया है। 2024 में CCI ने Zomato और इसके राइवल Swiggy को कंपटीशन रूल्स तोड़ने का दोषी पाया था। 2022 में NRAI की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच में पाया गया कि Zomato और Swiggy जैसे प्लेटफॉर्म्स अपने बिजनेस प्रैक्टिसेज से कॉम्पिटिशन को नुकसान पहुंचा रहे थे। रिपोर्ट में Zomato के एक्सक्लूसिव कॉन्ट्रैक्ट्स और Swiggy की ग्रोथ स्ट्रेटेजी पर सवाल उठाए गए थे। हालांकि, CCI ने अभी फाइनल फैसला नहीं सुनाया है, लेकिन बड़े जुर्माने या बिजनेस में बड़े बदलाव की आशंका बनी हुई है। इसी के चलते, Zomato ने ऐसे क्लॉज़ हटा दिए हैं जो रेगुलेटरी जांच को बढ़ा सकते थे।

भारत का फूड सर्विसेज मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, जिसके 2031 तक $94 अरब से बढ़कर $153 अरब तक पहुंचने का अनुमान है। इस बड़े और कॉम्पिटिटिव मार्केट में Zomato और Swiggy मुख्य खिलाड़ी हैं। Zomato का मार्केट शेयर ज़्यादा है, लेकिन Swiggy भी तेजी से ग्रो कर रहे क्विक-कॉमर्स सेक्टर में मजबूत है। Zomato ने Blinkit को एक्वायर कर इस सेक्टर में अपनी पकड़ मजबूत की है। ऐसे में, रेस्टोरेंट्स को खुश रखना Zomato के लगातार ग्रोथ के लिए बेहद जरूरी है।

हाई वैल्यूएशन और निवेशकों की उम्मीदें

Zomato की मार्केट वैल्यूएशन लगभग $29 अरब (24 अप्रैल 2026 तक) है, जो बहुत हाई है। इसका प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो 1,085.77 (अप्रैल 2026 में) तक पहुंच गया है, जबकि पिछले बारह महीनों के आंकड़े 290 से ऊपर हैं। यह हाई वैल्यूएशन निवेशकों की कंपनी से बड़ी ग्रोथ की उम्मीदों को दर्शाता है। ऐसे में, कॉम्पिटिशन, रेगुलेटरी मुद्दे या ग्रोथ में कोई भी धीमी गति निवेशकों को चिंता में डाल सकती है। CCI की जांच, Swiggy से लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा और CEO दीपेंद्र गोयल से जुड़े कुछ विवाद भी कंपनी के लिए चुनौतियां बने हुए हैं।

एनालिस्ट्स की राय

इन चुनौतियों के बावजूद, एनालिस्ट्स Zomato को लेकर पॉजिटिव हैं। 'मॉडरेट बाय' (Moderate Buy) की रेटिंग के साथ, एनालिस्ट्स का अनुमान है कि शेयर की कीमत अगले 12 महीनों में ₹370 तक जा सकती है। हाल ही में, गोल्डमैन सैक्स ने 'Buy' रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट प्राइस ₹375 किया है, लेकिन क्विक-कॉमर्स ग्रोथ में संभावित मंदी को लेकर थोड़ी चिंता जताई है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.