Zoho चीफ श्रीधर वेंबू का भारत को बड़ा सहारा: कहा, 'बाहर का टैलेंट नहीं, अपना टेक स्ट्रेंथ बढ़ाओ!'

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Zoho चीफ श्रीधर वेंबू का भारत को बड़ा सहारा: कहा, 'बाहर का टैलेंट नहीं, अपना टेक स्ट्रेंथ बढ़ाओ!'
Overview

Zoho Corporation के फाउंडर श्रीधर वेंबू ने अमेरिका में रहने वाले भारतीय टैलेंट से भारत लौटने की जोरदार अपील की है। उनका मानना है कि देश का ग्लोबल रेस्पेक्ट (Global Respect) और 'सिविलाइजेशनल स्ट्रेंथ' (Civilizational Strength) विदेशों में प्रतिभाओं के काम करने से नहीं, बल्कि स्वदेशी टेक्नोलॉजी को मजबूत बनाने से आएगी। वेंबू के अनुसार, भारत की सेल्फ-रिलायंस (Self-Reliance) ग्रोथ के लिए यह बेहद जरूरी है।

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'अपने घर में टेक्नोलॉजी का निर्माण करें': वेंबू का मुख्य संदेश

Zoho Corporation के फाउंडर श्रीधर वेंबू ने संयुक्त राज्य अमेरिका में बसे भारतीय मूल के लोगों से वापस भारत लौटने का आग्रह किया है। वेंबू का मुख्य तर्क है कि भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा और सम्मान, उसके नागरिकों की विदेशों में उपलब्धियों से नहीं, बल्कि देश की अपनी तकनीकी क्षमताओं के विकास से आएगा। उन्होंने 27 अप्रैल, 2026 को X (पहले ट्विटर) पर यह बात कही। उनका मानना है कि भारत की 'सिविलाइजेशनल स्ट्रेंथ' (Civilizational Strength) देश के घरेलू इनोवेशन (Innovation) और टेक लीडरशिप पर निर्भर करती है।

वैश्विक सम्मान के लिए स्वदेशी टेक जरूरी, न कि सिर्फ एक्सपोर्ट

वेंबू ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक सम्मान ठोस घरेलू टेक स्किल्स (Tech Skills) से आता है, न कि केवल आर्थिक आंकड़ों या डायस्पोरा (Diaspora) से हासिल प्रभाव से। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भारत बाहरी मदद पर निर्भर रहता है, तो आर्थिक आंकड़ों को वास्तविक स्थिति से भ्रमित नहीं करना चाहिए। उनका मानना है कि राष्ट्रीय समृद्धि, सुरक्षा और वैश्विक प्रभाव देश के अपने टेक भविष्य को नियंत्रित करने से जुड़े हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत से प्रतिभा पलायन ('ब्रेन ड्रेन') एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है, जहां दशकों से टैलेंट विदेशों की ओर गया है।

ग्लोबल टेक में भारत की बढ़ती भूमिका

भारत तेजी से वैश्विक टेक्नोलॉजी में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है। यह AI इकोसिस्टम में दुनिया में तीसरे स्थान पर है, सिर्फ अमेरिका और चीन से पीछे। इस वृद्धि को एक बड़े टैलेंट पूल से बल मिला है: 40 लाख से अधिक IT प्रोफेशनल्स और हर साल 10 लाख से अधिक इंजीनियर ग्रेजुएट होते हैं, जिनमें से कई AI और मशीन लर्निंग में हैं। भारत में टेक खर्च 2026 में 13.4% तक बढ़ने की उम्मीद है, जो एशिया-प्रशांत के अधिकांश देशों से तेज है। भारत के इनोवेशन इकोसिस्टम को भी वैश्विक स्तर पर मान्यता मिली है। Zoho Corporation खुद इस प्रगति को दर्शाता है, जहाँ भारत अब इसका दूसरा सबसे बड़ा बाजार बन गया है और यह राजस्व का एक प्रमुख स्रोत है, जो उन्नत डिजिटल टूल्स की स्थानीय मांग में वृद्धि का संकेत देता है।

बदलाव: 'ब्रेन ड्रेन' से 'ब्रेन गेन' की ओर

विदेशों में भारतीय प्रोफेशनल्स के जाने की कहानी बदल रही है। जिसे पहले 'ब्रेन ड्रेन' (Brain Drain) कहा जाता था, अब उसे 'ब्रेन सर्कुलेशन' (Brain Circulation) या 'ब्रेन गेन' (Brain Gain) के रूप में देखा जा रहा है। अधिक कुशल भारतीय अब देश के विकास में मदद करने के लिए घर लौट रहे हैं। दुनिया भर में 3.5 करोड़ से अधिक लोगों का भारतीय डायस्पोरा, निवेश, ज्ञान साझा करने और नए व्यवसायों के लिए एक बड़ी शक्ति है। उनके योगदान ने टेक इंडस्ट्री और रिसर्च ग्रुप शुरू करने में मदद की है, जिससे भारत के वैश्विक आर्थिक संबंधों और छवि में काफी सुधार हुआ है। प्रवासी भारतीय दिवस (Pravasi Bharatiya Divas) जैसी सरकारी पहलों का उद्देश्य इस महत्वपूर्ण समुदाय को शामिल करना है।

घर में टेक स्ट्रेंथ बनाने में आने वाली बाधाएं

अपनी ताकत के बावजूद, भारत को शीर्ष प्रतिभाओं को बनाए रखने और आकर्षित करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। भारत में टेक सैलरीज 2026 में लगभग 10% बढ़ने की उम्मीद है, जो एशिया-प्रशांत में सबसे ज्यादा है। यह कुशल श्रमिकों के लिए मजबूत प्रतिस्पर्धा और उच्च लागत का संकेत देता है। भारत में AI डेवलपर्स की एक बड़ी संख्या है, लेकिन विशेष AI रिसर्च साइंटिस्ट्स और AI गवर्नेंस एक्सपर्ट्स की कमी अपनाने की गति और वैश्विक मानक-निर्धारण को धीमा कर सकती है। इसके अलावा, अमेरिका सहित वैश्विक कंपनियों ने अक्सर आयातित प्रतिभाओं पर भरोसा किया है, जिससे बाहर के विशेषज्ञों का उपयोग करने की तुलना में घरेलू विकास को बढ़ावा देना कठिन हो गया है। विदेशों में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की बड़ी संख्या (11.6 लाख से अधिक, जनवरी 2024 तक) इस बहिर्वाह को जारी रखती है, जिसके लिए सिर्फ पैसों से परे रिटेंशन (Retention) के प्रयासों की आवश्यकता है। श्रीधर वेंबू ने स्वयं 'नेशनल मिशन फॉर टेक रेजिलिएंस' (National Mission for Tech Resilience) का आह्वान किया है, जो भू-राजनीतिक जोखिमों और टेक वेपॉनाइजेशन (Tech Weaponization) से बचाने के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम और सॉफ्टवेयर जैसे क्षेत्रों में सेल्फ-रिलायंस (Self-Reliance) पर जोर देता है।

भारत के टेक भविष्य का निर्माण

वेंबू का आह्वान, भारत द्वारा अपनी युवा आबादी और बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था का उपयोग करके एक सेल्फ-रिलायंट (Self-reliant) टेक लीडर बनने की रणनीति के अनुरूप है। देश का लक्ष्य AI में नेतृत्व करना है, जिसमें डेटा सेंटरों में महत्वपूर्ण निवेश और बढ़ता स्टार्टअप सीन इस लक्ष्य के लिए एक मजबूत नींव तैयार कर रहा है। घरेलू टेक लीडर्स का पोषण करके और एक ऐसा वातावरण बनाकर जहां लौटने वाले प्रोफेशनल्स अनुसंधान और इनोवेशन में मूल्य जोड़ सकें, भारत न केवल आर्थिक विकास बल्कि अपनी 'सिविलाइजेशनल स्ट्रेंथ' के आधार पर वास्तविक वैश्विक प्रभाव और सम्मान हासिल करने का प्रयास कर रहा है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.