Zerodha CEO की चेतावनी: सावधान! फिनटेक ऐप्स मांग रहे हैं ऐसी परमिशन, जिस पर मंडरा रहा है यूज़र्स का भरोसा!

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AuthorNeha Patil|Published at:
Zerodha CEO की चेतावनी: सावधान! फिनटेक ऐप्स मांग रहे हैं ऐसी परमिशन, जिस पर मंडरा रहा है यूज़र्स का भरोसा!
Overview

Zerodha के CEO, Nithin Kamath, ने फिनटेक (Fintech) ऐप्स द्वारा मांगी जा रही अत्यधिक यूजर परमिशन, जैसे SMS और कॉन्टैक्ट्स तक की एक्सेस, को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने इसे 'Least Privilege' के सिद्धांत के खिलाफ बताया है।

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डिजिटल भरोसे पर खतरा?

Zerodha के फाउंडर Nithin Kamath ने साफ तौर पर कहा है कि कई फाइनेंसियल और बैंकिंग ऐप्स सुरक्षा के बहाने यूज़र्स से उनके SMS, कॉन्टैक्ट्स और फोन डेटा तक की एक्सेस मांग रहे हैं। उनका कहना है कि यह 'Least Privilege' के सिद्धांत के खिलाफ है, जिसके अनुसार किसी भी ऐप को केवल वही डेटा एक्सेस करना चाहिए जिसकी उसे अपने काम के लिए न्यूनतम जरूरत हो। इस तरह की इनवेसिव (Invasive) परमिशन मांगने वाली ऐप्स डिजिटल फाइनेंस मार्केट में एक बड़ा भरोसे का गैप (Trust Gap) पैदा कर सकती हैं।

Zerodha का 'प्राइवेसी फर्स्ट' अप्रोच

लगभग ₹30,000 करोड़ की वैल्यूएशन वाली Zerodha अपनी कस्टमर-केंद्रित रणनीति के लिए जानी जाती है। Nithin Kamath ने Zerodha के Kite ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का उदाहरण दिया, जो बिना किसी मोबाइल डिवाइस परमिशन के काम करता है। यह प्राइवेसी पर Zero-Tolerance (शून्य सहनशीलता) Zerodha को Groww और Upstox जैसे प्रतिस्पर्धियों से अलग बनाती है।

भारत का डेटा सुरक्षा पर फोकस

Kamath की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत अपना डेटा प्रोटेक्शन फ्रेमवर्क (Data Protection Framework) मजबूत कर रहा है। Digital Personal Data Protection (DPDP) Act 2023 के तहत कंपनियों को यूज़र्स की सहमति, डेटा का न्यूनतम कलेक्शन और जवाबदेही जैसे नियमों का पालन करना होगा, वरना ₹250 करोड़ तक का भारी जुर्माना लग सकता है। इसके अलावा, SEBI भी निवेशकों की सुरक्षा बढ़ा रहा है। SEBI ने 1 अक्टूबर, 2025 से सभी रजिस्टर्ड फाइनेंशियल इंटरमीडिएरीज के लिए वेरिफाइड UPI हैंडल (जो '@valid' से समाप्त होते हों) का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया है, ताकि धोखाधड़ी रोकी जा सके। RBI ने भी डेटा एक्सेस को सीमित करने और कंसेंट मैनेजमेंट पर जोर दिया है।

एक्सेसिव परमिशन के खतरे

लगातार इनवेसिव ऐप परमिशन का इस्तेमाल करने वाली फाइनेंसियल फर्म्स के लिए यह एक बड़ा रिस्क है। यूज़र्स उन प्लेटफॉर्म्स की ओर जा सकते हैं जिन्हें वे ज्यादा सुरक्षित और उनके डेटा का सम्मान करने वाला मानते हैं। इससे उन कंपनियों को कॉम्पिटिटिव डिसएडवांटेज (Competitive Disadvantage) का सामना करना पड़ता है जो आक्रामक डेटा-गैदरिंग (Data-Gathering) तरीके अपनाती हैं। इसके अलावा, डेटा ब्रीच (Data Breach) का खतरा भी बढ़ जाता है, खासकर जब ऐप्स के पास बहुत ज्यादा एक्सेस हो।

'प्राइवेसी बाय डिज़ाइन' का भविष्य

Nithin Kamath द्वारा शुरू की गई यह चर्चा भारत के फिनटेक सेक्टर में 'Privacy by Design' (डिज़ाइन में ही प्राइवेसी) की ओर एक बड़े बदलाव का संकेत देती है। जैसे-जैसे यूज़र्स अधिक जागरूक हो रहे हैं और रेगुलेशंस कड़े हो रहे हैं, जो कंपनियां कम डेटा कलेक्ट करेंगी और स्पष्ट कंसेंट (Consent) के तरीके अपनाएंगी, उन्हें भविष्य में फायदा होगा। यह यूज़र-केंद्रित दृष्टिकोण डिजिटल इकोनॉमी में ग्राहकों की लॉयल्टी (Loyalty) बढ़ाने और भरोसेमंद डिजिटल फाइनेंसियल सर्विसेज के विकास को बढ़ावा देगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.