नतीजों से पहले ब्रोकरेज की मिली-जुली राय
IT सेक्टर की दिग्गज कंपनी Wipro के Q4 नतीजों का इंतजार है। बाजार को उम्मीद है कि इस बार नतीजे मिले-जुले रह सकते हैं। Nuvama की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 9% घटकर लगभग ₹3,239 करोड़ रह सकता है। वहीं, पिछली तिमाही से तुलना करें तो इसमें 6% की गिरावट आ सकती है। Nuvama का अनुमान है कि मार्जिन में 30 बेस पॉइंट्स की कमी आ सकती है, जिसका मुख्य कारण Harman एक्विजिशन और हालिया वेतन वृद्धि को माना जा रहा है। हालांकि, करेंसी (मुद्रा) से मिलने वाली राहत थोड़ी मदद कर सकती है।
दूसरी ओर, Kotak Institutional Equities का नजरिया थोड़ा अलग है। वे ₹3,667 करोड़ से ज्यादा के एडजस्टेड नेट प्रॉफिट का अनुमान लगा रहे हैं, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 3% ज्यादा होगा। Kotak का मानना है कि रुपये में आई गिरावट, वेतन वृद्धि और इंटीग्रेशन के खर्चों की भरपाई कर देगी, जिससे मार्जिन स्थिर बने रहेंगे।
रेवेन्यू: एक्विजिशन या ऑर्गेनिक ग्रोथ?
Wipro के रेवेन्यू पर Harman डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन बिजनेस जैसे एक्विजिशन का बड़ा असर दिखेगा। Nuvama का अनुमान है कि Q4 में रेवेन्यू ₹24,397 करोड़ हो सकता है, जो पिछली तिमाही से 4% ज्यादा है। इसमें से लगभग 1.5% रेवेन्यू Harman डील से आने की उम्मीद है। Kotak का अनुमान है कि कुल रेवेन्यू ₹24,741 करोड़ के करीब होगा, जो पिछले साल के मुकाबले 10% ज्यादा है।
लेकिन Kotak की रिपोर्ट यह भी बताती है कि ऑर्गेनिक रेवेन्यू में 0.7% की गिरावट आ सकती है। इससे यह साफ है कि कंपनी की रिपोर्टेड ग्रोथ मुख्य रूप से एक्विजिशन के बूते पर है, और कोर बिजनेस में सुस्ती को छिपाने के लिए इन डील्स का सहारा लिया जा रहा है।
EBIT और मार्जिन का गणित
Earnings Before Interest and Taxes (EBIT) को लेकर भी अनुमान बंटे हुए हैं। Nuvama को EBIT में पिछले साल के मुकाबले मामूली 1% की बढ़त के साथ ₹3,959 करोड़ रहने की उम्मीद है, लेकिन मार्जिन में कमी आ सकती है। इसके विपरीत, Kotak ₹4,258 करोड़ के EBIT का अनुमान लगा रहा है, जो पिछले साल के मुकाबले 9% की अच्छी बढ़त है। Kotak का मानना है कि करेंसी का फायदा वेतन दबाव को कम करेगा, जिससे मार्जिन स्थिर रहेंगे। ऐसे में, एक्विजिशन को संभालना और लागतों को कंट्रोल करना Wipro के मार्जिन के लिए अहम होगा।
वैल्यूएशन और सेक्टर का दबाव
7 अप्रैल 2026 को Wipro का शेयर अपने प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो के हिसाब से लगभग 15.60x पर ट्रेड कर रहा था। यह वैल्यूएशन TCS (लगभग 17.8x) और Infosys (लगभग 18.5x) जैसे अपने बड़े भारतीय IT साथियों की तुलना में बेहतर है, जबकि HCL Technologies का P/E 23.1x से भी ज्यादा था। इससे लगता है कि निवेशक Wipro में ग्रोथ की कम संभावनाएं या ज्यादा जोखिम देख रहे हैं।
हाल ही में, 8 साल की एक बड़ी डील, जिसमें Olam Group के साथ $1 बिलियन का समझौता हुआ है (जिसमें AI ट्रांसफॉर्मेशन सर्विसेज के लिए $800 मिलियन शामिल हैं), के चलते Wipro का शेयर 3% से ज्यादा उछला था, जबकि Nifty IT इंडेक्स 2% बढ़ा था। हालांकि, पूरा IT सेक्टर AI के बढ़ते प्रभाव और आर्थिक अनिश्चितता के कारण दबाव में है, और Nifty IT इंडेक्स साल-दर-साल करीब 25% गिर चुका है।
पिछले नतीजों पर निवेशकों की प्रतिक्रिया
पिछले कुछ सालों में Wipro के Q4 नतीजों पर निवेशकों की प्रतिक्रिया अक्सर नकारात्मक रही है, भले ही मुनाफा बढ़ा हो। उदाहरण के तौर पर, Q4 FY25 के नतीजे आने के बाद भी शेयर 6% गिरा था, क्योंकि कंपनी का भविष्य का गाइडेंस कमजोर था। अप्रैल 2025 में भी Q4 FY25 नतीजों के बाद शेयर 6% से ज्यादा लुढ़क गया था। अप्रैल 2024 में Q4 FY24 के नतीजों में मुनाफा और रेवेन्यू दोनों गिरे थे, और उसी समय श्रीनिवास पल्लिया CEO बने थे। यह दिखाता है कि निवेशक मौजूदा मुनाफे से ज्यादा कंपनी के भविष्य के आउटलुक और बिजनेस सेगमेंट के प्रदर्शन पर ध्यान देते हैं।
सावधान रहने के कारण
हालिया शेयर उछाल और Olam Group के बड़े डील के बावजूद, कुछ चीजें चिंता का विषय बनी हुई हैं। नए CEO श्रीनिवास पल्लिया के सामने AI के इस बदलते दौर में कंपनी को आगे ले जाने की बड़ी चुनौती है। Wipro का कम P/E रेश्यो बाजार की सतर्कता को दर्शाता है, और Harman जैसे एक्विजिशन पर उसकी निर्भरता कोर रेवेन्यू में गिरावट को छिपा सकती है। IT इंडस्ट्री में AI पारंपरिक सर्विसेज जैसे कोडिंग, टेस्टिंग और मेंटेनेंस को बाधित कर सकता है, जिससे रेवेन्यू में कमी आ सकती है। Wipro में वॉलंटरी एट्रिशन रेट (कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की दर) बढ़कर 14.2% हो गई है, जो हायरिंग और रिटेंशन में मुश्किलों का संकेत है। विश्लेषकों की राय भी बंटी हुई है, 'Sell' से लेकर 'Buy' तक की रेटिंग्स मिल रही हैं, जो एक अनिश्चित भविष्य की ओर इशारा करती हैं।
Wipro की AI स्ट्रेटेजी को लागू करने की क्षमता और इन चुनौतियों के बीच मार्जिन को स्थिर बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण होगा।